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एसएसपी कार्यालय के सामने की जमीन खाली कराने के खिलाफ याचिका खारिज

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Petition against vacant land in front of SSP office dismissed
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एसएसपी कार्यालय के सामने स्थित राजकीय अस्थान की जमीन से अवैध कब्जा खाली कराने के खिलाफ दाखिल याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। याची ललित मोहन गुप्ता की याचिका पर दशहरे के अवकाश के दिन बैठी न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी की विशेष पीठ ने कहा कि इस मामले में प्रशासन ने जानबूझकर अदालत के आदेश की अवहेलना नहीं की है इसलिए जिलाधिकारी प्रयागराज के खिलाफ अवमानना की प्रक्रिया शुरू करने का कोई औचित्य नहीं है।
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याचिका में कहा गया था कि हाईकोर्ट द्वारा याची के प्रत्यावेदन पर विचार कर निर्णय लेने का आदेश देने के बावजूद प्रशासन और प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने 24 अक्तूबर को उनका निर्माण ढहा दिया। जबकि कोर्ट ने 20 सितंबर 2019 को आदेश दिया था कि याची के प्रत्यावेदन पर सुनवाई के बाद दो माह में उपयुक्त आदेश पारित किया जाए तब तक ध्वस्तीकरण की प्रस्तावित कार्रवाई निलंबित रहेगी।
याची का कहना था कि उसने पीडीए द्वारा भेजे गए ध्वस्तीकरण नोटिस पर आपत्ति और प्रत्यावेदन छह जुलाई 2019 को दिया था मगर कोर्ट के आदेश के अनुसार उसका निस्तारण न करके प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी जो अदालत के आदेश की अवमानना है।
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इसलिए जिलाधिकारी प्रयागराज के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की जाए। याचिका का विरोध कर रहे सरकारी वकीलों ने कहा कि अधिकारियों ने याची के प्रत्यावेदन पर हाईकोर्ट के निर्देशानुसार 18 सितंबर 2020 को ही निस्तारण कर दिया था। इसके बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई गई है। वकीलों ने इससे संबंधित आदेश की प्रति भी अदालत में पेश की।
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कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों द्वारा आदेश की अवहेलना नहीं की गई है। याची चाहे तो ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को उचित अदालत या फोरम में चुनौती दे सकता है।
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