इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएम फतेहपुर को गर्भपात की इजाजत मांगने वाली दुष्कर्म से गर्भवती हुई नाबालिग पीड़िता को छह हफ्ते में मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने दुष्कर्म पीड़िता और उसके पिता की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
मामला फतेहपुर जिले के थरियांव थाना क्षेत्र का है। याची का कहना है कि उसकी नाबालिग बेटी को आरोपी बहला फुसला कर गुजरात ले गया। परिजनों की ओर से थाना थरियांव में अपहरण का मुकदमा भी दर्ज कराया गया। बेटी की बरामदगी के कुछ दिन बाद मेडिकल जांच में पता लगा कि वह गर्भ से है। आरोपी युवक पर दुष्कर्म और पाक्सो एक्ट की धाराएं भी बढ़ा दी गईं।
याची ने गर्भपात के लिए जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र दिया। कोर्ट ने पीड़िता की मेडिकल जांच का आदेश दिया। सरकारी वकील की ओर से पेश की गई रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी को तीन दिनों के भीतर गर्भपात करने की इजाजत दे दी और जिलाधिकारी फतेहपुर को रानी लक्ष्मी बाई महिला सम्मान कोष से छह हफ्ते में मुआवजा देने का आदेश दिया है।