इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकारी कर्मचारियों पर आपराधिक षड्यंत्र, दुष्कर्म, कदाचार, अनुचित लाभ लेने जैसे अपराध का अभियोग चलाने के सरकार से इसकी अनुमति लेना जरूरी नहीं है। इन पर बिना अनुमति लिए मुकदमा चल सकता है। कोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 का संरक्षण, लोक सेवक को पदीय दायित्व निभाने के दौरान हुए अपराधों तक ही प्राप्त है।
यदि सरकार ने अभियोग चलाने की मंजूरी दे दी है तो ऐसे आदेश के खिलाफ अनुच्छेद 226 के तहत याचिका पोषणीय नहीं है। आरोपी को विचारण न्यायलय में अपनी आपत्ति दाखिल करने का अधिकार है। इस अधिकार का इस्तेमाल कोर्ट के आरोप पर संज्ञान लेने के समय या आरोप निर्मित करते समय किया जा सकता है। यहां तक कि अपील पर भी यह आपत्ति की जा सकती है। कोर्ट को सरकार की अभियोजन चलाने की अनुमति की वैधता पर निर्णय लेने का अधिकार है। कोर्ट साक्ष्य के आधार पर देखेगी कि अपराध का संबंध कर्तव्य पालन से जुड़़ा है या नहीं।