फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Prayagraj News: इलाज के लिए भटकते रहे लोग, भर्ती मरीजों से नहीं मिल सके तीमारदार

विज्ञापन
एसआरएन  में हुई मारपीट की घटना के बाद  के बाद शुल्क काउंटर पर तैनात पुलिस। अमर उजाला। - फोटो : shiv tripathi
विज्ञापन
हड़ताल समाप्त होने की घोषणा के बाद बृहस्पतिवार की सुबह मरीज आम दिनों की तरह एसआरएन अस्पताल पहुंचे लेकिन ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर खुलते ही जूनियर डॉक्टरों ने बंद करा दिया। इसके अलावा ट्रॉमा सेंटर में गंभीर मरीजों को लेने से मना कर दिया गया।
विज्ञापन

प्रयागराज के अलावा जौनपुर, भदोही, मिर्जापुर, मछली शहर, चित्रकूट, बांदा, फतेहपुर, कौशाम्बी और प्रतापगढ़ सहित मध्य प्रदेश के रीवां जिले से इलाज कराने पहुंचे मरीज परेशान हो गए। इतना ही नहीं डॉक्टरों के साथ मौजूद अस्पताल के सुरक्षा कर्मियों ने पीएमएसएसवाई बिल्डिंग की ओपीडी से मरीजों को बाहर कर दिया।
मरीज अपने सिर पर हाथ धर कर बैठ गए। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। सुरक्षा कर्मियों ने वार्ड में भर्ती मरीजों के तीमारदारों को बाहर भी रोक दिया। ऐसे में कई तीमारदारों के हाथ में दवा का पैकेट, किसी के हाथ में खाना व नाश्ता का थैला था। काफी मिन्नतों के बाद भी तीमारदारों को मरीज से नहीं मिलने दिया गया।
विज्ञापन



इनसेट

पीने को मिला गर्म पानी
अस्पताल में आने वाले मरीजों को चौतरफा मार का सामना करना पड़ा। एक तरफ हड़ताल और दूसरी तरफ गर्मी उनकी अग्नि परीक्षा ले रही थी। वहीं, अस्पताल परिसर में पीने के लिए ठंडे पानी की व्यवस्था भी नहीं थी। परिसर में लगी टोटियों से सिर्फ गर्म पानी ही मरीजों को पीने के लिए मिला।



इनसेट
अम्मा चल-फिर नहीं पाती हैं, सुबह से भूखी हैं, खाना देना है...

जौनपुर निवासी जडाउती देवी एक हफ्ते से पीएमएसएवाई बिल्डिंग के न्यूरोलॉजी विभाग में भर्ती हैं। सुबह जब नाती रितेश खाना लेकर अस्पताल पहुंचा तो सुरक्षाकर्मियों ने अंदर जाने से मना कर दिया। इस दौरान रितेश ने हाथ जोड़ते हुए कहा कि अम्मा भूखी हैं, दवा देना है, खाना लेकर आए हैं...अंदर जाने दो।

बोले परेशान तीमारदार
हमें पता ही नहीं था कि हड़ताल है। तबीयत ठीक नहीं लग रही है। पता होता तो पास ही कहीं दिखा लेते। इतनी भीषण गर्मी में यहां न आते। बैद्यनाथ, प्रतापगढ़


रीवां से आए हैं। डॉक्टर साहब हड़ताल पर हैं। ऐसे में वापस जाना-फिर किसी दिन आना। यह दिक्कत की बात है। हड़ताल नहीं होनी चाहिए। रीता कौल, रीवां, मध्य प्रदेश


शरीर में दर्द है। बड़ी मुश्किल से डॉक्टर साहब को दिखाने का माैका मिला। लेकिन यहां तो हड़ताल है। भीषण गर्मी में दोबारा आना पड़ेगा। शिव चंद्र यादव, गोपीगंज

-
सिर में दर्द है। गर्मी में इतनी दूर आना मुश्किल होता है। अब कह रहे हैं कि वापस जाओ हड़ताल है। लगता है जान ही निकल जाएगी। शकुंतला देवी, मिर्जापुर
-
पैथोलॉजी में नहीं हुईं जांचें
इसी बीच सुपर स्पेशलिस्ट इमारत की ओपीडी, रजिस्ट्रेशन काउंटर, स्ट्रेचर स्टैंड, एक्सरे, सिटी स्कैन की जांच व पैथोलॉजी से संबंधित सभी जांचें ठप रहीं। सुबह आठ बजे पुरानी इमारत का रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद करा दिया गया। ट्रॉमा से गंभीर मरीजों को वापस लौटा दिया गया। वहीं, ओपीडी ब्लॉक में सीनियर कंसल्टेंट मौजूद रहे। करीब 11.30 बजे एसीएम फस्ट सत्यम मिश्रा ने राउंड के दौरान पुरानी बिल्डिंग के रजिस्ट्रेशन काउंटर को फिर से शुरू कराया। लेकिन तब तक कई मरीज वापस हो गए थे। ऐसे में कुल 303 मरीजों का ही पर्चा बन सका। इसके अलावा 11 मरीजों को भर्ती किया जा सका। बतादें कि एसआरएन अस्पताल की ओपीडी में औसतन 3500 मरीज रोज देखे जाते हैं।

एक शिफ्ट के बाद डायलिसिस बंद, लौटे किडनी के रोगी
प्रयागराज। हड़ताल के दौरान किडनी रोगियों को बिना डायलिसिस कराए वापस लौटना पड़ा। सुबह के समय नौ मरीजों का डायलिसिस हुआ। जिसके बाद नौ मरीजों को दूसरी शिफ्ट के लिए बुलाया गया था। लेकिन हड़ताल की वजह से दूसरी पाली की डायलिसिस को रोक दिया गया। किडनी रोगी निराश लौट गए। एसआरएन अस्पताल में प्रतिदिन करीब 45 किडनी रोगियों की डायलिसिस होती है। जबकि कई मरीजों को तीन से चार महीने तक स्लॉट खाली होने का इंतजार करना पड़ता है।

विवाद पर जूनियर डाॅक्टर की सफाई
कल सुबह करीब साढ़े छह बजे पांच से छह लोग मरीज लेकर आए। अधिक भीड़ होने की वजह से उन्हें बाहर जाने के लिए कहा गया। वह बहस करने लगे। वीडियो बनाने लगे। विरोध करने पर महिला जूनियर डॉक्टर से मारपीट की। जिसके बाद कई अन्य लोग भी झगड़ा करने पहुंच गए। इस दौरान ट्रॉमा सेंटर का दरवाजा भी तोड़ दिया गया। ऐसे में जब तक क्रॉस एफआईआर नहीं दर्ज हो जाती और जेआर की सुरक्षा का भरोसा नहीं दिया जाता हड़ताल जारी रहेगी।
डॉ. आलोक गर्ग, जेआर
-
देर शाम बंद कराया जन औषधि केंद्र व मेडिकल स्टोर
जूनियर डॉक्टरों ने शाम करीब छह बजे एसआरएन अस्पताल परिसर में स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र को बंद करा दिया। इसके अलावा अस्पताल के पास स्थित मेडिकल स्टोरों पर भी जूनियर डॉक्टरों ने ताला लगवाया। वहीं, जन औषधि केंद्र और मेडिकल स्टोर के पास खड़े मरीजों को दवा लिए बिना ही वापस लौटना पड़ा।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें