कोहड़ार मे गैस की किल्लत से भट्टी का इस्तेमाल करता युवक।
क्षेत्र में इन दिनों सिलिंडर की भारी किल्लत के कारण आम जनता और छोटे व्यापारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गैस सिलिंडरों के अभाव में अब लोग पुराने दौर की तरह कोयले की भट्ठियों पर निर्भर हो गए हैं।
कस्बा निवासी दुकानदार अशोक सिंह ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि गैस एजेंसियों के चक्कर लगाकर लोग थक चुके हैं। घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी सिलिंडर उपलब्ध नहीं हो पा रही है। सिलिंडर न मिलने के कारण अब कोयले की भट्ठी जलानी पड़ रही है, जिससे काम करना मुश्किल हो गया है।
ग्रामीण लल्लू और इन्द्रजीत ने बताया की कोयले की भट्ठी से निकलने वाला तीखा धुआं आंखों में जलन पैदा कर रहा है और दिन भर हाथ कोयले से काले रहते हैं। इसका सीधा असर उनके व्यापार पर भी पड़ रहा है।
भट्ठी के धुएं और गंदगी को देखकर अब ग्राहक भी दुकान पर आने से कतराने लगे हैं, जिससे आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। क्षेत्र के अन्य निवासियों ने भी रोष व्यक्त करते हुए कहा कि गैस की इस किल्लत ने गृहणियों और होटल-ढाबा संचालकों की कमर तोड़ दी है।