लाइफ सर्टिफिकेट यानी जीवित होने का प्रमाणपत्र देने के लिए बैंक पेंशनरों पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए दबाव नहीं बना सकते हैं। पिछले वर्ष नवंबर माह में लाइफ सर्टिफिकेट जमा किए जाने के दौरान तमाम केंद्रीय पेंशनरों ने इस मसले पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद सरकार ने बैंकों को दिशा-निर्देश जारी कर हिदायत दी कि पेंशनर्स नियमों के तहत लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर रहे हैं तो बैंक में उनकी शारीरिक रूप से उपस्थिति अनिवार्य नहीं है और बैंक इसके लिए उन पर दबाव न बनाएं।
सीनियर एकाउंट्स अफसर डीके सैनी की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि पेंशनरों को लाइफ सर्टिफिकेट देने के लिए बैंकों में उपस्थित न होना पड़े, इसीलिए ‘करक्शन स्लिप नंबर-14’ की व्यवस्था की गई है। अगर पेंशनर इस स्लिप के साथ अपने जीवित होने का प्रमाणपत्र बैंक को भेज रहा है तो पेंशनर पर बैंक में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का दबाव नहीं बनाया जा सकता और न ही इसकी जरूरत है। इसके अलावा सरकार ने मौजूदा वित्तीय वर्ष प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’ मिशन के तहत ‘करक्शन स्लिप नंबर-22’ के रूप में एक ऐसा सॉफ्टवेयर भी डेलवप किया है, जिसकी मदद से पेंशनर अपने आधार नंबर के माध्यम से बैंक में उपस्थित हुए बगैर जीवित होने का प्रमाणपत्र दे सकते हैं। ऐसे में बैंक किसी भी सामान्य या पारिवारिक पेंशनर पर बैंक में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का दबाव बनाकर उन्हें परेशान न करें।