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प्रयागराज : चेहरे से बनेगा जीवन प्रमाण पत्र, घर बैठे जमा कर सकेंगे पेंशनभोगी, इस साल दो करोड़ का लक्ष्य

Wed, 04 Nov 2026 02:56 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अब पेंशनभोगियों को जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के लिए बार-बार बैंक या कोषागार जाने की जरूरत नहीं होगी। मोबाइल फोन से चेहरे की पहचान कराकर घर बैठे ही यह काम किया जा सकेगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए नवंबर में देशव्यापी अभियान शुरू किया है। इस बार दो करोड़ से अधिक प्रमाण पत्र बनाने और एक लाख से ज्यादा शिविर लगाने का लक्ष्य है।

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प्रयागराज में संयुक्त सचिव पेंशन ध्रुबज्योति सेन गुप्ता ने पेंशनधारकों की समस्याएं सुनीं। - फोटो : संवाद।
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विस्तार
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पेंशन पाने वालों को हर साल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के लिए परेशान न होना पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार ने नवंबर में विशेष अभियान शुरू किया है। एक से 30 नवंबर तक चलने वाले इस पांचवें देशव्यापी अभियान में पेंशनभोगियों के डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं। इस साल दो करोड़ से अधिक प्रमाण पत्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि अब पेंशनभोगी अपने मोबाइल फोन से चेहरे की पहचान कराकर घर बैठे ही जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकेंगे।

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पिछले साल इस अभियान के दौरान 1.92 करोड़ डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा किए गए थे। इनमें 1.16 करोड़ प्रमाण पत्र चेहरे की पहचान के जरिए बनाए गए थे। इस बार सरकार का जोर इसी सुविधा को अधिक से अधिक पेंशनभोगियों तक पहुंचाने पर है।

बुधवार को प्रयागराज के कोषागार में लगे शिविर में पहुंचे भारत सरकार के संयुक्त सचिव (पेंशन) ध्रुबज्योति सेनगुप्ता ने बताया कि यह अभियान केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार मिलकर चला रही हैं। इसमें सरकारी विभागों के अलावा बैंक, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक, आधार से जुड़ी संस्था और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की जीवन प्रमाण टीम भी सहयोग कर रही है।
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अभियान के लिए करीब 1400 अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। नवंबर में देशभर में करीब तीन हजार शिविर लगाए जा रहे हैं, ताकि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले पेंशनभोगियों को भी इसका लाभ मिल सके।

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चेहरे से पहचान कर जमा होगा प्रमाण पत्र

संयुक्त सचिव ने बताया कि चेहरे की पहचान वाली सुविधा से पेंशनभोगी घर बैठे कभी भी अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। इसके लिए आधार से जुड़ी पहचान की सुविधा का इस्तेमाल किया जाता है।

उन्होंने बताया कि जीवन प्रमाण पत्र बनाने की सुविधा वर्ष 2014 में शुरू हुई थी। पहले अंगूठे के निशान या आंखों की पुतली से पहचान की जाती थी। उम्र बढ़ने के साथ कई बुजुर्गों को इन तरीकों से पहचान कराने में परेशानी होने लगी। इसे देखते हुए वर्ष 2019-20 में चेहरे की पहचान से प्रमाण पत्र बनाने की सुविधा शुरू की गई। अब इसी सुविधा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

एक लाख से अधिक शिविर लगाने की तैयारी

ध्रुबज्योति सेनगुप्ता ने बताया कि पिछले साल पूरे अभियान के दौरान करीब 75 हजार शिविर लगाए गए थे। इस बार इनकी संख्या एक लाख से अधिक करने की तैयारी है। इसके लिए देश के सभी राज्यों, जिलों और प्रमुख उपमंडलों तक शिविर लगाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार भी अभियान में पूरा सहयोग कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य उन बुजुर्ग पेंशनभोगियों तक सुविधा पहुंचाना है, जिन्हें डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने में परेशानी होती है।
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डिजिटल प्रमाण पत्र को बताया सुरक्षित

डिजिटल धोखाधड़ी की आशंका पर संयुक्त सचिव ने कहा कि जीवन प्रमाण पत्र आधार के माध्यम से सत्यापित होता है। चेहरे की पहचान करने वाला ऐप कई विशेषताओं के आधार पर व्यक्ति की पहचान करता है। उन्होंने डिजिटल तरीके को सुरक्षित बताते हुए कहा कि कागज पर प्रमाण पत्र जमा करने में उसके खोने या उसकी प्रति का गलत इस्तेमाल होने की आशंका रहती है।

उन्होंने बताया कि पेंशनभोगी अपना जीवन प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नजदीकी शिविर, डाकघर या बैंक शाखा में जा सकते हैं। वहां मौजूद कर्मचारी और अधिकारी प्रमाण पत्र बनाने में मदद करेंगे। उन्होंने पेंशनभोगियों से समय पर जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की अपील की, ताकि उनकी पेंशन बिना किसी रुकावट के मिलती रहे।
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