प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) अपने भूखंडों का भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के जरिए सर्वे कराने जा रहा है। इससे ऐसे भूखंडों के बारे में पता लगाया जाएगा जहां निर्माण हो चुके हैं। मई में यह कार्य प्रारंभ हो जाएगा। सर्वे में करीब 483 भूखंड आएंगे। ऐसे भूखंडों के बारे में स्पष्ट तौर पर कोई जानकारी विभाग को नहीं है कि वह किस स्थिति में हैं। जबकि, भूखंडों की बाजार में कीमत करीब 110 करोड़ से अधिक की है।
अवैध निर्माण का धंधा जोरों पर चल रहा है। इस पर कार्रवाई की धीमी रफ्तार का फायदा भूमाफिया और बिल्डर मिलकर उठा रहे हैं। अब ऐसे लोगों पर नकेल लगाने व जवाबदेही तय करने के लिए प्रयागराज विकास प्राधिकरण भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के माध्यम से मैपिंग कराने की तैयारी में जुट गया है।
सैकड़ों ऐसे भूखंड हैं जिस पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। इसमें ऐसे कितने भूखंडों पर भवन खड़े हैं, कितने पर अवैध कब्जे हैं, कितने खाली हैं इसका स्पष्ट ब्यौरा नहीं है। कारण, इस खेल में विभागीय कर्मचारी भी शामिल हैं। ऐसे में पीडीए के अधिकारियों ने जीआईएस मैपिंग कराने का निर्णय लिया है।
मैपिंग कार्य में एचडीएफसी बैंक फैसिलिटेटर के रूप में कार्य करेगा। इसके लिए एक एजेंसी हायर की जाएगी जो मैपिंग कराए जाने में मदद करेगी। एजेंसी अपनी रिपोर्ट पीडीए को सौपेंगी। इसके बाद प्राधिकरण हो रहे वैध और अवैध निर्माण पर नजर रखते हुए समय रहते नियमानुसार उचित कार्यवाही करेगा। प्राधिकरण इसके लिए रूपरेखा तैयार करने में जुटा गया है। फिलहाल तकरीबन 500 ऐसे भूखंड हैं जिनका सर्वे कराए जाने की तैयारी है। सर्वे में स्पष्ट तौर पर पता चल जाएगा कि कितने भूखंडों पर भू-माफियाओं और बिल्डरों का कब्जा है, कितने भूखंड खाली और कितने अतिक्रमण की जद में हैं।
कोट:
प्राधिकरण की करीब 110 करोड़ के भूखंडों की स्थिति का स्पष्ट तौर पर पता लगाने के लिए जीआईएस सर्वे कराए जाएंगे। एचडीएफसी बैंक फैसिलिटेटर के रूप में कार्य करेगा। सर्वे के माध्यम से भूखंडों को चिन्हित करना मुख्य उद्देश्य है।
- डा. अमित पाल शर्मा - उपाध्यक्ष, प्रयागराज विकास प्राधिकरण।