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सुप्रीमकोर्ट की सहमति से आयोग अध्यक्ष को हटा सकते हैं राष्ट्रपति

Wed, 01 Apr 2015 11:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
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संघ लोक सेवा आयोग हो या राज्य लोक सेवा आयोग, इसके सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल की ओर से की जाती है। संविधान के अनुच्छेद 316 में लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान है। इसके अनुसार राज्यों के लोक सेवा आयोग के सदस्यों और अध्यक्ष की नियुक्ति राज्यपाल की ओर से जाएगी। नियुक्त किए गए सदस्यों में से तकरीबन आधे सदस्य ऐसे होंगे जो केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष की सेवा कर चुके हों।
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संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत राष्ट्रपति लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के खिलाफ कदाचार की शिकायत मिलने पर सर्वोच्च न्यायालय से इसकी जांच को कहेगा। अनुच्छेद 145 के तहत निर्धारित प्रक्रिया से जांच के बाद प्रतिवेदन पर राष्ट्रपति, अध्यक्ष या सदस्य को पद से हटा सकेंगे। राष्ट्रपति या राज्यपाल को सुप्रीमकोर्ट में जांच लंबित होने की अवधि में भी अध्यक्ष या सदस्य को निलंबित करने का अधिकार होगा।

इसके अतिरिक्त अध्यक्ष या सदस्य के दिवालिया घोषित होने या कोई लाभ का पद धारण कर लेने अथवा शारीरिक रूप से दायित्व का निर्वहन करने में अक्षम होने की स्थिति में भी राष्ट्रपति या राज्यपाल उसे पद से हटा सकेंगे।
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लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर आवेदन करने वालों मं रिटायर्ड आईएएस विनय कुमार यादव, अजय अग्रवाल, अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सिंह यादव, रिटायर्ड एडीशनल कमिश्नर वाणिज्यकर विश्वम्भर दयाल, खलील अहमद, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर कोमल चंद्र वर्मा, मेजर जनरल बीपी तिवारी के अलावा दर्जनों एसोसिएट प्रोफेसर शामिल थे। 83 आवेदकों की सूची में अनिल यादव का नाम अंतिम पायदान पर था लेकिन सभी को दरकिनार करके  वरीयता देते हुए उनका चयन किया गया। अनिल यादव पूर्व में लोक सेवा आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं। सरकार का कहना है कि उन्होंने नियमानुसार बायोडाटा दिया था और डीएम मैनपुरी ने उनके चरित्र पर अपनी रिपोर्ट दी जिसमें कुछ भी विपरीत नहीं पाया गया।
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