पीसीएस का पेपर आउट होने तथा उत्तर प्रदेश लोक सेवा अयोग की भर्तियों में गड़बड़ी की लगातार शिकायतों के बाद भी सरकार की ओर से अध्यक्ष और अन्य अफसरों पर किसी तरह का अंकुश लगता नहीं दिख रहा है। उन्हें हर मामले में क्लीन चिट दे दी गई है। हां, अध्यक्ष के खिलाफ आंदोलनरत छात्रों और प्रतियोगियों पर पहरेेदारी जरूर बढ़ा दी गई है। आलम यह है कि छात्रों के गढ़ वाले शहर उत्तरी का बड़ा इलाका बृहस्पतिवार को लगातार दूसरे दिन भी छावनी में तब्दील रहा। प्रतियोगियों का आरोप है कि आयोग अध्यक्ष पर अंकुश लगाने के बजाय पुलिस के दम पर सरकार उनकी आवाज दबाने में जुटी है लेकिन वे चुप नहीं बैठेंगे।
प्रतियोगियों और छात्रों के आंदोलन के मद्देनजर बृहस्पतिवार को भी आयोग दफ्तर की जबरदस्त नाकेबंदी की गई थी। आयोग दफ्तर से हिन्दू हॉस्टल तक हर जगह फोर्स रही। धोबी घाट, राणा प्रताप चौराहा समेत आयोग की तरफ जाने वाली हर सड़क पर बैरियर लगा रहा तथा फोर्स तैनात रही। आयोग की तरफ जाने वाली हर सड़क पर बड़े वाहनों का प्रवेश भी प्रतिबंधित रहा। इसके अलावा इलाहाबाद विश्वविद्यालय, सभी हॉस्टल, बघाड़ा, सलोरी आदि मोहल्लों के प्रमुख चौराहे पुलिस और पीएसी की पहरेदारी में रहे। स्थिति यह रही कि कहीं भी युवाओं को इकट्ठा नहीं होने दिया जा रहा था। विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन पर भी सुरक्षा कर्मियों का कब्जा रहा। यहां तक कि सत्ता पक्ष से जुड़े छात्र नेताओं तक को वहां नहीं रुकने दिया और पूरे परिसर में सन्नाटा पसरा रहा।
अवनीश पांडेय, अमरेंदु सिंह आदि आंदोलनकारियों का कहना है कि आखिर कितने दिन उन पर इस तरह से पहरेदारी की जाएगी। उनका कहना है कि जब तक मांग मान नहीं ली जाती उनका आंदोलन जारी रहेगा। आइसा की बैठक में भी आयोग अध्यक्ष को बर्खास्त करने तथा सीबीआई जांच का आदेश देने के बजाय छात्रों पर इस तरह की पहरेदारी पर गुस्सा दिखा। छात्रों का कहना था कि इस तरह के माहौल से उनमें असंतोष बढ़ रहा है। इससे अराजकता का माहौल बन रहा है। बैठक में प्रदेश सचिव अखिल विकल्प, जिला संयोजक विकास स्वरूप, जय प्रकाश, सूर्य प्रकाश, सुयश, सत्येंद्र, पंकज आदि मौजूद रहे।