इलाहाबाद। लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित पीसीएस प्री 2015 परीक्षा का पेपर लीक होने के मामले में हाईकोर्ट ने आयोग पर गंभीर टिप्पणियां की हैं। कोर्ट ने कहा है कि पेपर लीक होने जैसी घटनाएं बड़ी चूक हैं। इस मामले में आयोग को स्वयं ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। एक आंतरिक जांच होनी चाहिए जिसमें जिम्मेदारी तय की जाए।
अधिवक्ता सुनीता शर्मा द्वारा दाखिल जनहित याचिका निस्तारित करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिस पर छात्रों का अटूट विश्वास है। इसकी गतिविधियां छात्रों के भविष्य से जुड़ी हैं, जिसके लिए वह कड़ी मेहनत करते हैं। पीठ ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि जिस सरकारी नौकरी के लिए छात्र दिन रात अटूट विश्वास के साथ मेहनत करते हैं, उसका पर्चा आयोग की वजह से लीक हो जाए। आयोग को स्वयं इसकी जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
खंडपीठ ने कहा कि इस परीक्षा की सीबीआई जांच कराने तथा दोबारा परीक्षा कराने की मांग में याचिका एक अन्य पीठ द्वारा खारिज की जा चुकी है इसलिए उनका कोई आदेश देना उचित नहीं होगा। मगर पर्चा लीक जैसे गंभीर मामले में सिर्फ केंद्र व्यवस्थापक पर प्राथमिकी दर्ज करा देना ही पर्याप्त कदम नहीं है। आयोग आत्मचिंतन करे कि उसकी विश्वसनीयता पर दोबारा ठेस न पहुंचे।
पीठ ने कहा कि पीसीएस प्री की परीक्षा में दो लाख 62 हजार 190 अभ्यर्थी बैठे थे। पेपर लीक होने की सूचना में पर 2849 छात्रों ने दूसरे प्रश्नपत्र की परीक्षा छोड़ दी। ऐसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में भाई भतीजावाद से कड़ाई से निपटा जाना चाहिए।