उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राज्य / प्रवर अधीनस्थ सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 एवं सहायक वन संरक्षक / क्षेत्रीय वन अधिकारी सेवा परीक्षा रविवार को प्रदेश के सभी 75 जिलों में आयोजित हुई। इस बार प्रश्नपत्र में उत्तर प्रदेश से संबंधित सवालों की संख्या अधिक रही, जिससे अभ्यर्थियों की तैयारी की असली परीक्षा हो गई।
प्रथम पाली के पेपर में पूछे गए सवालों में एक प्रश्न, पुष्कर कुंभ मेला 2025 का आयोजन किस प्रदेश में हुआ, ने अभ्यर्थियों को उलझा दिया। कई परीक्षार्थी इसे महाकुंभ समझ बैठे और उत्तर में प्रयागराज लिख आए, तथ्यात्मक और तर्कशक्ति आधारित सवालों की भरमार रही। प्रथम पाली के 150 प्रश्नों में ज्ञानपीठ पुरस्कार, वैश्विक पर्यावरण सुविधा, ऑपरेशन ओलिविया, संसद की संयुक्त बैठक, स्वेज नहर, जालियांवाला बाग हत्याकांड, राष्ट्रीय मतदाता दिवस, संविधान दिवस, मानवाधिकार दिवस, और भारत के उपराष्ट्रपति से संबंधित सवाल शामिल रहे। इसके अलावा पूछा गया कि स्वावलंबिनी महिला उद्यमिता कार्यक्रम किस मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया, तथा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं भाषा कौन सी है।
भाषा परखने वाले पूछे गए सवाल
दूसरी पाली में तर्क और भाषा परखने वाले सवाल पूछे गए। पूछे गए 100 सवालों में झांसी क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा, आगरा-मथुरा की प्रमुख बोली, और उत्तर प्रदेश में न बोली जाने वाली बोली जैसे प्रश्न शामिल थे। इसके साथ ही सरस्वती देवी का रूप किसे माना जाता है, द्रौपदी का पर्यायवाची शब्द, और तर्कशक्ति आधारित प्रश्न जैसे, एक महिला ने एक फोटोग्राफ की ओर इशारा करते हुए कहा, वह मेरी मां के पिता की एकलौती पुत्री है। फोटोग्राफ वाला व्यक्ति उससे क्या संबंध रखता है। इसने अभ्यर्थियों को खूब उलझाया। इसी तरह 11 मित्रों द्वारा आपस में एक बार हाथ मिलाने पर हैंड शेक की संभावित संख्या पूछी गई, जिसके विकल्प 65, 55, 22, 56 थे।
अभ्यर्थियों की राय, पेपर संतुलित लेकिन पेचीदा
- अरुण कुमार (गाजीपुर) ने बताया कि पेपर का स्तर मध्यम से कठिन था। राजनीतिक विज्ञान के सवाल अपेक्षाकृत आसान रहे, जबकि भूगोल के प्रश्न तथ्य-आधारित थे।
- शिवांगी (प्रतापगढ़) ने कहा कि उत्तर प्रदेश विशेष से इस बार अधिक प्रश्न पूछे गए, जबकि राजनीतिक विज्ञान से कम और इतिहास से अधिक सवाल आए।
- सौरभ (सुल्तानपुर) ने कहा कि करंट अफेयर्स से बहुत कम प्रश्न आए, जबकि भूगोल और इतिहास का हिस्सा भारी रहा।
- कीर्ति श्रीवास्तव (प्रतापगढ़) के अनुसार पेपर कठिन था, और राजनीति व इतिहास दोनों से पर्याप्त प्रश्न आए।
- निलेश यादव (गाजीपुर) ने बताया कि पेपर का स्तर मध्यम था। जिन्होंने तैयारी की थी, उनके लिए यह सहज रहा। प्रश्नपत्र का पैटर्न संतुलित था और वर्ष 2024 की तुलना में कुछ आसान लगा।