उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की परीक्षा में एक बार फिर पेपर आउट होने का मामला सामने आने के बाद अब पीसीएस-2017 पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इस परीक्षा के तहत पीसीएस के 677 पदों पर भर्ती की जानी है। पिछले साल जून में हुई मुख्य परीक्षा के दौरान एक केंद्र में पहली पाली की परीक्षा में दूसरी पाली का पेपर बंट जाने के कारण काफी बवाल हो गया था और आयोग को उस दिन आयोजित दोनों पेपरों की परीक्षा निरस्त करनी पड़ी थी। फिर परीक्षा बाद में कराई गई थी। आयोग ने मुख्य परीक्षा का रिजल्ट अब तक जारी नहीं किया है।
पिछले साल 19 जून को पीसीएस-2017 की मुख्य परीक्षा के दौरान पहली पाली में सामान्य हिंदी और दूसरी पाली में निबंध का पेपर था। जीआईसी केंद्र में पहली पाली की परीक्षा के दौरान दूसरे पाली में होने वाला निबंध का पेपर पहुंच गया था। पेपर बंटने के बाद अभ्यर्थियों ने बवाल कर दिया, जिसके बाद आयोग ने प्रदेश भर में दोनों पाली की परीक्षा निरस्त कर दी थी और दोनों परीक्षाएं सात जुलाई को आयोजित की थी। बाद में इस मामले की जांच हुई और संबंधित प्रिंटिंग प्रेस को तीन साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। आयोग के कुछ कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई थी।
उस दिन भी जीआईसी केंद्र पहुंचीं परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार पर अभ्यर्थी भड़क गए थे और उन्होंने परीक्षा नियंत्रक पर पेपर आउट करवाने का आरोप लगाया था। इस मामले में भी आयोग के कुछ कर्मचारी और अफसरों के साथ बाहरी व्यक्तियों की मिलीभगत का आरोप लगाया था। हालांकि, आयोग ने पेपर आउट नहीं माना था। एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती पेपर लीकर प्रकरण में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद हुए खुलासे से यह परीक्षा भी जांच के दायरे में आ गई है और अब इस पर भी संकट मंडरा रहा है।
पेपर वायरल होने पर दर्ज हुआ था मुकदमा
पीसीएस-2017 की मुख्य परीक्षा में समाज कार्य का पेपर एक दिन पहले व्हाट्सएप पर वायरल हो गया था। हालांकि, आयोग ने इसे फर्जी बताते हुए सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। मामले की जांच साइबर सेल को सौंपी गई थी। हालांकि, दूसरे दिन परीक्षा हुई तो वायरल पेपर और परीक्षा में बांटे गए पेपर के सवालों में काफी अंतर था। अभ्यर्थी आरोप लगा रहे थे कि आयोग पेपर कई सेटों में छपवाता है और पेपर वायरल होने के कारण आयोग ने दूसरे सेट का पेपर बंटवा दिया था।