मंच पर जामवंत महाबली हनुमान को उनकी शक्तियों का स्मरण कराते हैं और अगले ही पल महाबली हनुमान का स्वरूप विशाल होने लगता है। देखते ही देखते महाबली हनुमान समुद्र लांघने के लिए महाछलांग लगाते हैं और लंका में पहुंचते हैं। यह दृश्य देख तालियों की गड़गड़ाहट और जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठता है।
निर्देशक अतुल यदुवंशी की परिकल्पना में श्री कटरा रामलीला कमेटी की रामलीला प्रस्तुति ‘गाथा राम की...’ के सातवें दिन यह दृश्य देखने को मिला।
असीम छलांग: समुद्र लांघन से अशोक वाटिका’ प्रसंग के मंचन में संपाती ने माता सीता का पता बताने, सुरसा की परीक्षा, लंकिनी से सामना और विभीषण से भेंट तक की कथा दिखाई गई। इसके बाद अशोक वाटिका में रावण के प्रलोभनों के सामने माता सीता की अडिग निष्ठा और त्रिजटा के स्वप्न का मंचन हुआ।
प्रस्तुति का भावुक क्षण तब आया। जब हनुमान जी ने माता सीता को प्रभु श्रीराम की मुद्रिका सौंपी और उनका संदेश सुनाया। मुद्रिका देखकर माता सीता की आंखों से छलके आंसुओं ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
इससे पहले राज्यसभा सदस्य राधाकांत ओझा, विधान परिषद सदस्य अनूप गुप्ता, भाजपा काशी प्रांत के उपाध्यक्ष अवधेश चंद गुप्ता और कमेटी अध्यक्ष सुधीर गुप्ता कक्कू सहित पदाधिकारियों ने रामायण की आरती की। इस दौरान महामंत्री उमेश केसरवानी, कोषाध्यक्ष अश्वनी केसरवानी आदि रहे।