कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि पिता बच्चे का प्राकृतिक अभिभावक है। बच्चा अपने पिता के घर अपने छोटे भाई केसाथ खुश है और वह वहीं रहकर पढ़ाई करना चाहता है। उसे अपने पिता से कोई शिकायत नहीं है। ऐसे में याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि, कोर्ट ने मां को अपने बच्चों को मिलने से छूट दी। कहा कि पिता को भी इस पर आपत्ति नहीं है।
बशर्ते की मां जब मिलने जाए तो इसकी सूचना पहले देनी होगी। मां कभी भी किसी भी वक्त अपने बच्चों से मिल सकती है। कोर्ट ने माता और पिता को यह भी निर्देश दिया है कि वे किसी तहर का विवाद उत्पन्न नहीं करेंगे। कोर्ट ने इस निर्देश केसाथ याचिका को अस्वीकार कर दिया।