फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रतापगढ़ : पंचायत चुनाव भी नहीं जीत सका देश को विदेशमंत्री देने वाला राजघराना 

Tue, 04 May 2021 12:47 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़

सार

  • पूर्व विदेशमंत्री स्व. राजा दिनेश सिंह की पौत्री और तीन बार सांसद रहीं रत्ना की बेटी तनुश्री को जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में मिली करारी हार 
  • एकतरफा मुकाबले में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी गीता द्विवेदी ने हराया
विज्ञापन
पूर्व सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह की पुत्री तनुश्री। - फोटो : prayagraj
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कालाकांकर राजघराने को जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। पूर्व विदेश मंत्री स्व. राजा दिनेश सिंह की पौत्री और प्रतापगढ़ से तीन बार सांसद रहीं रत्ना सिंह की बेटी तनुश्री को जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। भाजपा समर्थित प्रत्याशी तनुश्री को कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी गीता द्विवेद्वी ने एकतरफा मुकाबले में भारी अंतर से पराजित किया है। तनुश्री की हार से रामपुर खास विधानसभा में जमीन तलाश रहे भाजपाइयों को करारा झटका लगा है। 
विज्ञापन


कालाकांकर राजघराने से जुड़े स्व. राजा दिनेश सिंह प्रतापगढ़ से कई बार सांसद चुने गए। वह देश के विदेशमंत्री भी रहे। देश की राजनीति में भी उनका बड़ा नाम था। उनके निधन के बाद उनकी बेटी राजकुमारी रत्ना सिंह राजनीति में उतरीं। वह कांग्रेस से तीन बार जिले की सांसद रहीं। कुछ दिनों पहले रत्ना सिंह ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद से कालाकांकर राजघराना रामपुर खास में अपनी जमीन तैयार करने में लगा था। रत्ना सिंह के बेटे भुवन्यु सिंह भी रामपुर खास में लगातार सक्रिय रहे।

लोगों में चर्चा है कि वह विधानसभा चुनाव में यहां से भाजपा से दावेदारी कर सकते हैं। इस बीच जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में ही कालाकांकर राजघराने ने कांग्रेस के गढ़ में ताल ठोंक दी। पूर्व सांसद रत्ना  सिंह की बेटी तनुश्री को भाजपा ने सांगीपुर द्वितीय से जिला पंचायत सदस्य का प्रत्याशी घोषित कर दिया। इसके बाद कालाकांकर राजघराने ने तनुश्री की सियासी पारी शुरू करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। लाव-लश्कर के साथ नामांकन किया गया। चुनाव-प्रचार में भाजपाइयों ने पूरी जान लगा दी। जिला पंचायत का चुनाव कालाकांकर राजघराने के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया। पूर्व सांसद रत्ना सिंह, उनके बेटे भुवन्यु सिंह समेत भाजपा नेताओं ने तनुश्री को जिताने के लिए दिन-रात एक कर दिया।
विज्ञापन


मतदान के दिन भी भाजपाई सक्रिय रहे। लेकिन रविवार सुबह मतगणना शुरू होते ही तनुश्री की सियासी पारी डगमगाने लगी। गिनती के दौरान हर राउंड में वह लगातार पिछड़ती चली गईं। तीन राउंड की मतगणना के बाद ही साफ हो गया कि तनुश्री को सियासी पारी की शुरुआत में ही हार का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी गीता द्विवेद्वी ने उन्हें करारी शिकस्त दी। भाजपा समर्थित तनुश्री को लगभग सात हजार मतों से हार का सामना करना पड़ा। एकतरफा मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी की जीत से कांग्रेसियों में खुशी की लहर दौड़ गई। जबकि कालाकांकर राजघराने समेत रामपुर खास में भाजपा खेमे में मायूसी छा गई। 

और अपने ही गढ़ में हारी कांग्रेस 

जिला पंचायत के चुनाव में कांग्रेस को अपने गढ़ में ही हार का सामना करना पड़ा है। रामपुर खास विधानसभा के लालगंज ब्लाक जिला पंचायत की तीनों सीटों पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। यह हार दिग्गज कांग्रेसी नेता प्रमोद तिवारी व विधायक मोना के लिए भी तगड़ा झटका है। हालांकि सांगीपुर व संग्रामगढ़ ब्लाक में कांग्रेस का दबदबा कायम दिखा।

रामपुर खास चार दशकों से कांग्रेस का गढ़ रहा है। यहां से दिग्गज कांग्रेसी नेता प्रमोद तिवारी लगातार विधायक बनते रहे। उनके राज्यसभा सदस्य बनने के बाद बेटी मोना मिश्रा ने विरासत संभाली। मोना भी दो बार से लगातार विधायक हैं। कांग्रेस के गढ़ में जिला पंचायत की सीट पर सबकी नजर थी। सांगीपुर में चार में से तीन सीटें जीतकर कांग्रेस ने अपना दबदबा कायम रखा। उधर, रामपुर-संग्रामगढ़ ब्लाक में तीन में दो सीटों पर कांग्रेस के जिला पंचायत सदस्य एकतरफा जीत दर्ज करने में कामयाब रहे, लेकिन लालगंज ब्लाक की जिला पंचायत की तीन सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा है। लालगंज की तीन सीटों में से दो पर सपा समर्थित प्रत्याशी विजयी रहे, जबकि एक सीट भाजपा के हाथ में चली गई। 

चुनाव जीते, हार गए जिंदगी की जंग 

मतदान के बाद जिंदगी की जंग हारने वाले प्रधान पद के प्रत्याशी को जीत मिली है। वह अपनी जीत देखने और प्रमाण पत्र लेने के लिए दुनिया में नहीं रहे। रामपुर-संग्रामगढ़ विकास खंड के प्रतापरुद्रपुर ग्राम पंचायत की सामान्य सीट पर हरिकेश बहादुर उर्फ सिंधी सिंह ने नामांकन पत्र दाखिल किया था। मतदान के दिन तक उन्होंने बूथ से लेकर गांव तक जमकर मेहनत की। मतदान के चार दिन बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। प्रधान पद के प्रत्याशी स्व. सिंधी सिंह के निधन के बाद परिजनों में मातम पसर गया और कोई भी मतगणना में नहीं गया। उनके समर्थक मतगणना कराने पहुंचे। मतगणना के बाद आखिरकार जिंदगी की जंग हार जाने वाले सिंधी सिंह को जीत मिली, लेकिन खुशियां मनाने वाला कोई नहीं था। उनके  निधन से परिजन व समर्थक गहरे शोक में हैं। असमय जिंदगी की जंग हारने वाले सिंधी सिंह के नाम जीत दर्ज होने की क्षेत्र में दिनभर चर्चा होती रही।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें