चुनाव ड्यूटी में रोडवेज बसें लगा दिए जाने से सप्ताह भर से मुसाफिर खासे परेशान हैं। इलाहाबाद परिक्षेत्र के सिविल लाइंस, जीरो रोड, लीडर रोड और प्रयाग डिपो की 50 से ज्यादा बसें जिला प्रशासन ने पंचायत चुनाव में लगा दी हैं। चुनाव ड्यूटी में वहीं बसे लगाई गईं हैं जो इलाहाबाद के आसपास वाले इलाकों को जोड़ती हैं।
रोडवेज के इलाहाबाद परिक्षेत्र में कुल बसों की संख्या 380 हैं। परिक्षेेत्र में इलाहाबाद का जीरो रोड, सिविल लाइंस, लीडर रोड, प्रयाग बस स्टेशन शामिल है। इसके अलावा मिर्जापुर, लालगंज, प्रतापगढ़ और बादशाहपुर डिपो की बसें भी इलाहाबाद परिक्षेत्र में ही शामिल हैं। जिले में हो रहे पंचायत चुनाव में रोडवेज प्रशासन ने सिविल लाइंस, जीरो रोड, लीडर रोड और प्रयाग डिपो की 50 बसों को लगा दिया है। बसों की कमी से सबसे ज्यादा परेशानी इलाहाबाद से आसपास के स्थानों पर जाने वाले यात्रियों को हो रही है। इसका फायदा डग्गामार बस संचालक और छोटे वाहन चालक उठा रहे हैं। यात्री मनमाना किराया देने को मजबूर हैं।
उधर, चुनाव ड्यूटी में लगी बसों से यात्रियों को भले ही परेशानी हो रही हो लेकिन रोडवेज को इससे हर रोज लाखों रुपये की कमाई हो रही है। दरअसल जिन बसों को चुनाव ड्यूटी में लगाया गया उसके किराये से ही रोडवेज को आमदनी हो जा रही है। चुनाव ड्यूटी में लगी बस चले या खड़ी रहे, रोडवेज को हर रोज के हिसाब से किराया मिलता रहेगा। औसतन एक बस का एक दिन का किराया 17 हजार रुपये के आसपास रहता है। ऐसे में 50 बसों का ही एक दिन का किराया 8.5 लाख रुपये हो जा रहा है।