विशेष परिस्थिति में तैयार हुए मोती
डॉ. अजय सोनकर बताते हैं कि समुद्र में प्रदूषण काफी बढ़ चुका है। लिहाजा, समुद्र में कहीं भी तैयार किए गए मोती का इस्तेमाल कैंसर के इलाज के लिए नहीं किया जा सकता है। उनके मुताबिक उन्होंने विशेष परिस्थिति में मोती तैयार किए हैं। इसके अलावा अंडमान निकोबार में समुद्र के अनछुए क्षेत्र में भी मोती तैयार किए जाते हैं। इसी वजह से उनके मोती की विशेष मांग है।
100 ग्राम के लिए हटाईं 3500 मोती से परतें
डॉ. सोनकर बताते हैं कि 100 ग्राम मोती बेशकीमती हैं। इनकी कीमत देखें तो यह लाखों में है। इन्हें जुटाने के लिए करीब 3500 मोती से परत हटानी पड़ी। चूंकि संस्थान का शोध व्यापक लोकहित से जुड़ा है, इसलिए यह मोती मुफ्त में उपलब्ध कराए गए हैं। शोध में अन्य तकनीकी सहयोग भी दिया गया है।