शंकरगढ़, उरुवा और कोटवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भी अपना ऑक्सीजन प्लांट होगा। उद्योग और खादी ग्रामोद्योग विभाग के अफसरों संग शुक्रवार को हुई बैठक में कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि इफ्को फूलपुर में भी 31 मई से 500 सिलेंडर ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू हो जाएगा।
मंत्री ने बताया कि आईसीआईसीआई बैंक की मदद से शंकरगढ़ सीएचसी में 25 बेड का ऑक्सीजन प्लांट स्थापित होगा। अस्पताल में पाइपलाइन की मदद से सीधे बेड तक ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाएगी। इसके अलावा गन्ना विभाग की ओर से उरुवा सीएचसी में 50 बेड तथा कोटवा में 90 बेड के लिए ऑक्सीजन का उत्पादन किया जाएगा। इन केंद्रों में भी पाइपलाइन से ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाएगी। मंत्री ने बताया कि इफ्को फूलपुर में भी ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण अंतिम चरण में हैं।
31 मई से 500 सिलेंडर ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रभा इंजीनियरिंग की इकाई में भी जुलाई में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। मंत्री ने बताया कि बीपीसीएल में भी गतिरोध दूर कर जल्द ऑक्सीजन सिलेंडर का उत्पादन शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले में 3000 सिलेंडर ऑक्सीजन की आवश्यकता था। अभी 1700 सिलेंडर ऑक्सीजन बाहर से मंगाया जा रहा है लेकिन जल्द ही यहां 3500 सिलेंडर ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू हो जाएगा। प्रयागराज में उपयोग के बाद शेष ऑक्सीजन प्रतापगढ़, कौशाम्बी, फतेहपुर में भेजा जाएगा। मंत्री ने जिले में टीकाकरण, कोविड की जांच आदि बिंदुओं पर भी विस्तार से चर्चा की। बैठक में उपायुक्त उद्योग अजय चौरसिया समेत अनेक अफसर मौजूद रहे।
बीपीसीएल में ऑक्सीजन सिलेंडर के निर्माण पर संकट
बीपीसीएल में ऑक्सीजन सिलेंडर निर्माण को लेकर एक बार फिर गतिरोध बन गया है। सभी कर्मचारियों को 17 मई तक कार्यमुक्त करने का आदेश दिया गया है। सीएमडी के इस आशय के पत्र के बाद कर्मचारियों में नाराजगी तो है ही, ऑक्सीजन सिलेंडर के निर्माण पर भी संकट गहरा गया है। हालांकि कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनार्थ सिंह के साथ वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गतिरोध दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार तथा संबंधित विभाग के अफसरों से वार्ता के लिए अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल को जिम्मेदारी सौंपी है।
बीपीसीएल की सिलेंडर उत्पादन करने वाली इकाई 2013 से ही बंद है। इसके अलावा पिछले वर्ष दिसंबर में केंद्र सरकार ने पूरी कंपनी को बंद करने की घोषणा की थी। इसकी प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। इसी दौरान ऑक्सीजन संकट के बीच प्रदेश सरकार ने बीपीसीएल में 2500 सिलेंडर के निर्माण का ऑर्डर दिया है। इसके लिए वर्षों से बंद सिलेंडर उत्पादन करने वाली इकाई को फिर से चालू करने की कवायद शुरू की गई। कई मशीनें चालू भी हो गई हैं लेकिन दो दिनों के भीतर दो आदेशों से सिलेंडर उत्पादन को लेकर गतिरोध बन गया है। केंद्र सरकार की ओर से पहले आदेश आया कि भेल वाराणसी के माध्यम से बीपीसीएल में सिलेंडर का उत्पादन शुरू किया जाएगा।
इसी क्रम में बृहस्पतिवार को आए एक आदेश में सभी कर्मचारियों को स्वैछिक सेवानिवृत्ति के तहत 17 मई तक कार्यमुक्त करने के लिए कहा गया है। उम्मीदों के बीच आए इस आदेश से ऑक्सीजन सिलेंडर निर्माण के प्रस्ताव को भी झटका लगा है। बृहस्पतिवार को ही बीपीसीएल पहुंचे कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के सामने पूरा प्रकरण रखा गया। कर्मचारियों का कहना है कि मांग के अनुरूप सिलेंडर का निर्माण तीन महीने में हो जाएगा। तब तक उन्हें कार्यमुक्त न किया जाए। इस गतिरोध के बीच मंत्री ने मुख्यमंत्री से वार्ता की। सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कंपनी में आने वाली अड़चनों को दूर कर संचालन बनाए रखने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने केंद्र से वार्ता के लिए अपर मुख्य सचिव को जिम्मेदारी सौंपी है। मंत्री ने बीपीसीएल के कर्मचारियों के कार्यों की भी सराहना की।