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Prayagraj News: ऑक्सीजन पहुंचाने वाली मशीनें हांफीं, ऑस्ट्रेलियाई कंपनी बोली-भारत में मेरा कोई वितरक नहीं

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एसआरएन अस्पताल में कोरोना काल की आपदा को भी अवसर मानकर एक स्थानीय फर्म ने भुना लिया। इस फर्म ने ऑस्ट्रेलियाई कंपनी का वितरक बनकर सवा करोड़ मूल्य की 40 बाइपैप मशीनें लगा दीं। दो साल में ही टीबी चेस्ट विभाग की कुछ मशीनें खराब हुईं तो मेल भेजने पर कंपनी ने लिखा, भारत में मेरा कोई वितरक ही नहीं।
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कोरोना काल के दौरान के 2021 में मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज ने जैम पोर्टल के जरिये 10 करोड़ रुपये के चिकित्सा उपकरण खरीदे थे। इनकी आपूर्ति शुभम इंटरप्राइजेज समेत दो कंपनियों ने की थी।
दरअसल, शुभम इंटरप्राइजेज ने एसआरएन अस्पताल के सर्जरी, टीबी चेस्ट, ट्रॉमा, एनेस्थीसिया व मेडिसिन विभाग में कुल छह करोड़ के सामान की आपूर्ति की थी। इसमें आस्ट्रेलियाई कंपनी रेसमेड की 40 बाइपैप मशीनें भी शामिल हैं। कोराना काल में सांस की तकलीफ से जूझते मरीजों के लिए इनकी बेहद मांग थी, क्योंकि यह ऑक्सीजन को फेफड़ों तक पहुंचाने में मददगार हैं।
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मेडिकल कॉलेज सूत्रों के मुताबिक 3.94 लाख की दर से सवा करोड़ में ये बाइपैप मशीनें खरीदी गई थीं। इनकी पांच साल तक मेंटेनेंस का जिम्मा भी शुभम इंटरप्राइजेज ने लिया था। इतनी महंगी मशीनें दो साल में ही खराब होने लगीं। इन्हें ठीक कराने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शुभम इंटरप्राइजेज को संपर्क किया।
फिर, ऑस्ट्रेलियाई कंपनी को भी मेल भेजकर ठीक कराने का आग्रह किया। कंपनी के जवाब से पूरे प्रकरण की पोल खुल गई। कंपनी ने लिखा कि भारत में उनकी एक शाखा दिल्ली में है। भारत में दूसरा कोई वितरक नहीं है। सवाल है कि अधिकृत वितरक नहीं होने पर भी इस फर्म को आपूर्ति का जिम्मा कैसे मिल गया। सवाल पर जिम्मेदार अफसर मौन हैं।
वहीं, टीबी एंड चेस्ट डिपार्टमेंट के अध्यक्ष डॉ. एडी शुक्ला का दावा है कि पहले समस्या जरूर थी, लेकिन अब उनके विभाग की सभी बाइपैप मशीनें दुरुस्त करा ली गई हैं। यह ठीक काम भी कर रही हैं।
अंबु बैग के सहारे गंभीर मरीज

बाइपैप मशीनों के उपकरण नहीं मिलने से वह ठीक नहीं हो पा रहीं। ऐसे में गंभीर मरीजों को अंबु बैग पर रखना पड़ रहा है। गुब्बारेनुमा यह बैग खुद नहीं चलते। इसे हाथ से पुश करना पड़ता है, तब कहीं हवा मरीज के फेफड़ों तक पहुंच पाती है।
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