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कुंभ के प्रथम शाही स्नान से पहले खुलेगा मूल अक्षयवट, दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु

Tue, 18 Dec 2018 01:15 AM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
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अक्षयवट - फोटो : अमर उजाला
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कुंभ के प्रथम शाही स्नान मकर संक्रांति से पहले देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मूल अक्षयवट को खोल दिया जाएगा। प्रधानमंत्री के एलान के बाद अकबर के ऐतिहासिक किले में लंबे समय से बंद अक्षयवट तक जाने के लिए रास्ता बनाने का काम शुरू हो गया है। करीब 435 वर्ष पुराने इस किले की पूर्वी हिस्से की दीवार को खोलकर अक्षयवट तक जाने का रास्ता बनाया जाएगा। दीवारकिनारे के गड्ढों को भरने के साथ ही बैरीकेडिंग कराई जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन कराया जा सके।
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मूल अक्षयवट तक श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास का रास्ता तय कर लिया गया है। किले के पूर्वी द्वार से प्रवेश के बाद स्थित मंदिर केपास से दीवार खोलकर भीतर जाने का नया रास्ता बनाया जाएगा। किले की दक्षिणी दीवार के किनारे से ही श्रद्धालु अक्षय वट तक पहुंचेंगे। डीआईजी कुंभ मेला केपी सिंह के अनुसार पीएम की घोषणा के बाद मूल अक्षयवट तक श्रद्धालुओं के प्रवेश का खाका तैयार कर लिया गया है।

इसके लिए सेना, प्रशासन और पुलिस के अफसरों की एक दौर की समन्वय बैठक हो चुकी है। रूट निर्धारण पर जल्द ही फिर समन्वय बैठक होगी। एक उच्चाधिकारी ने बताया कि पीएमओ से अक्षयवट खोलने के संकेत मिलने के बाद पिछले नवंबर से ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। 1583 में निर्मित इस किले के भीतर स्थित आयुध भंडार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अक्षयवट के दर्शन की व्यवस्था बनाई जा रही है।
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श्रद्धालु पहले अक्षयवट जाएंगे। इसके बाद पालातपुरी में स्थित अन्य देवी-देवताओं, ऋषि-मुनियों की मूर्तियों के दर्शन करते हुए सरस्वती कूप के  दर्शन कर किले के पश्चिमी हिस्से में स्थित द्वार से त्रिवेणी मार्ग से होकर बाहर निकलेंगे। मकर संक्रांति के प्रथम शाही स्नान से पहले मूल अक्षयवट को आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।
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अक्षयवट का रास्ता खोलने पर बनी सहमति

अकबर के किले में स्थित पवित्र अक्षयवट खोलने के लिए केंद्र सरकार के निर्देश पर एमएनआईटी के चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल की ओर से स्ट्रेंथ परीक्षण कराया गया है। स्ट्रक्चर विभाग के एलके मिश्र के अलावा डॉ. कुमार वेंकटेश, डॉ. विजय कुमार समेत चार विशेषज्ञों ने किले की दीवार के पास ड्रिलिंग कराकर भीतर की मिट्टी की स्थिति और भार सहन करने की क्षमता का परीक्षण किया गया है। एमएनआईटी के निदेशक प्रो. राजीव त्रिपाठी ने इसकी पुष्टि की।

उन्होंने बताया कि शीर्ष अफसरों का जोर था कि जल्द परीक्षण रिपोर्ट दी जाए। इसे देखते हुए विशेषज्ञों ने किले की प्राचीनता और प्रस्तावित मार्ग पर भीड़ के दबाव के सहन करने की क्षमता का आकलन कर रिपोर्ट दे दी गई है। इस रिपोर्ट के अलावा सेना के भी इंजीनियरिंग विभाग ने किले की दीवार का परीक्षण कराया है। स्ट्रेंथ परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही अक्षयवट जाने के लिए नया मार्ग खोलने पर सहमति बनाई जा सकी।
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