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जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराने का आदेश

Fri, 19 Jun 2020 11:01 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
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सुप्रीमकोर्ट ने जिला पंचायत अध्यक्ष प्रयागराज रेखा सिंह के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर फिर से मतदान कराने का निर्देश दिया है। इससे पूर्व इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेखा सिंह के खिलाफ पारित अविश्वास प्रस्ताव को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ मतदान के दौरान निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया जिससे मतदान की गोपनीयता भंग हुई है।

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हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीमकोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई थी। लक्ष्मी सिंह और अन्य की ओर से दाखिल अपील पर न्यायमूर्ति एनवी रम्मना, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति कृष्णमुरारी की तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई की। 

prayagraj news - फोटो : prayagraj
याची के वकीलों का कहना था कि हाईकोर्ट का आदेश मतदान की गोपनीयता को लेकर सुप्रीमकोर्ट की संविधान पीठ द्वारा एस रघुवीर सिंह गिल केस के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। मतों की गोपनीयता का प्रश्न इस बात पर निर्भर करता है कि मतदान निष्पक्ष और भयमुक्त वातावरण में हो और मतदाताओं को विश्वास हो कि उनका मत सार्वजनिक नहीं होगा।

याची पक्ष के वकीलों ने अविश्वास प्रस्ताव पर फिर से मतदान कराने का कोर्ट का सुझाव दिया। याची भी इससे सहमत थे। इसे देखते हुए सुप्रीमकोर्ट ने जिला जज इलाहाबाद को निर्देश दिया है कि वह दो माह के भीतर मतदान की नई तिथि घोषित कर स्वयं या किसी अपर जिला जज की निगरानी में अविश्वास प्रस्ताव पर फिर से वोटिंग कराएं। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media
रेखा सिंह के खिलाफ 25 अक्तूबर 2018 को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराया गया था। 51 सदस्यों में 48 सदस्यों ने मतदान में भाग लिया। इनमें से दो सदस्यों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया जबकि एक मत निरस्त कर दिया गया।

शेष 45 मत अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में पड़े। पीठासीन अधिकारी ने उसी दिन अविश्वास प्रस्ताव आधे से अधिक के बहुमत से पारित घोषित कर दिया। रेखा सिंह ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। कहा गया कि मतदान के दौरान सदस्यों ने गोपनीयता का पालन नहीं किया और एक दूसरे को दिखाकर वोट डाले। इसकी वीडियो रिकार्डिंग भी हाईकोर्ट में पेश की गई। इसके आधार पर हाईकोर्ट ने अविश्वास प्रस्ताव रद्द कर दिया था।
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