अपनी मर्जी से दूसरे धर्म में शादी करने वाले जोड़े को हाईकोर्ट ने सुरक्षा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने एसएसपी प्रयागराज को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि उनके शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में किसी के द्वारा हस्तक्षेप न होने पाए।
कोर्ट ने नवविवाहित जोड़े को दो माह में विवाह का पंजीकरण कराने का आदेश दिया है अन्यथा कोर्ट का संरक्षण देने का आदेश स्वत: समाप्त हो जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि याचीगण के माता-पिता को लगता है कि गलत तथ्य देकर आदेश प्राप्त किया गया है तो वे आदेश वापस लेने की अर्जी दे सकते हैं।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा ने खुशी आर्या उर्फ खुशनुमा बानो और अन्य की याचिका पर दिया है। याची के अधिवक्ता शिवम् द्विवेदी का कहना था कि याचीगण बालिग हैं। उन्होंने अपनी मर्जी से 19 दिसंबर 2018 को शादी की है। परिवार वाले उन्हें परेशान कर रहे हैं। पुलिस भी उन्हें संरक्षण नहीं दे रही है।
याची का कहना था कि अंतर्जातीय और अंतरधार्मिक विवाह करने वालों को पुलिस संरक्षण देने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। कोर्ट ने देश भर के पुलिस प्रशासन को ऐसी शादी करने वाले बालिगों को संरक्षण देने और सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि उन्हें कोई उनका उत्पीड़न, धमकी या उनके खिलाफ हिंसा न करने पाए।