इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि दुकानदार ने परिसर में राशन रखे होने की सफाई दी है तो दोबारा निरीक्षण किए बगैर सस्ते गल्ले की दुकान का लाइसेंस निरस्त करना गैर कानूनी है। जिला आपूर्ति अधिकारी के ऐसे आदेश के खिलाफ अपील की बजाये याचिका दाखिल करना पोषणीय है। कोर्ट ने दुकान का लाइसेंस निरस्त करने के आदेश को रद्द करते हुए लाइसेंस बहाल कर दिया। न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय ने याची सीताराम के अधिवक्ता इंदु शेखर त्रिपाठी को सुनकर यह आदेश दिया है।
फिरोजाबाद के शिकोहाबाद तहसील के कुरही खेरिया निवासी याची को 23 फरवरी 2018 को सस्ते गल्ले की दुकान आवंटित की गई। 23 नवंबर 2022 को जिला आपूर्ति अधिकारी ने दुकान का निरीक्षण किया। इस दौरान कालाबाजारी के आरोप में याची के खिलाफ 29 दिसंबर 2022 को मुकदमा दर्ज कराया और दुकान जब्त कर दूसरे को आवंटित कर दी। याची ने अपनी सफाई में कहा कि बगल के कमरे में सारा अनाज रखा था, जिसका निरीक्षण नहीं किया गया। इसके बावजूद लाइसेंस निरस्त कर दिया गया।
याची ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की, जिसे कोर्ट ने मंजूर करते हुए जिला आपूर्ति अधिकारी को शासनादेश के आलोक में नए सिरे से आदेश जारी करने के लिए प्रकरण वापस कर दिया गया। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला आपूर्ति अधिकारी ने दुबारा लाइसेंस निरस्त करने का आदेश दिया, जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी।
याची वकील इंदु शेखर ने दलील दी कि जिला आपूर्ति अधिकारी ने निरीक्षण किया और लाइसेंस निरस्त कर दिया। अपील में आदेश निरस्त होने के बाद दुबारा अपने से नीचे के अधिकारी से जांच कराई। खुद ही लाइसेंस निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया। नियमानुसार रैंक में बड़े अधिकारी को आदेश देना चाहिए था। इसलिए लाइसेंस निरस्त करने का आदेश अवैध है।