हाईकोर्ट के आदेश के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में 600 करोड़ रुपये की धनराशि को लेकर जांच शुरू हो गई है। संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि हाईकोर्ट के पहले के आदेश पर विभाग के अफसर रिकार्ड नहीं दे पाए थे। इसके चलते मामले में कार्रवाई के लिए फिर से याचिका दायर की गई।
पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय खंड, खंड संख्या तीन और खंड संख्या चार को वित्त वर्ष 2012 से लेकर 2016 तक अरबों रुपये के बजट सड़क निर्माण के लिए आवंटित किए गए। आवंटित बजट के मुकाबले तीनों खंडों में कामकाज नहीं हुए। बजट कहां खर्च हो गया इसका कोई पता नहीं चला। चार वर्षों के दौरान प्रांतीय खंड में करीब 250 करोड़, खंड तीन से 25 करोड़ और खंड चार से 325 करोड़ रुपये की बचत निविदाओं की दरों में कमीं, मार्ग की लंबाई कम होने और डामर आदि की दरों में कमी आने से हुई थी लेकिन इन खंडों द्वारा बची रकम शासन को लौटाई नहीं गई। मामले को लेकर महेंद्र सिंह द्वारा हाईकोर्ट में जनहित याचिका पहले ही दायर की गई थी। मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले ने सुनवाई कर पीडब्ल्यू के मुख्य सचिव को मामले के निस्तारण के निर्देश दिए थे मुख्य सचिव ने विभाग के उच्चाधिकारियों के माध्यम से सारे रिकार्ड तलब किए लेकिन तीनों खंड से बची हुई धनराशि कहां खपाई गई इसका रिकार्ड अफसर मुहैया नहीं करा पाए हैं। इसी मामले में सुधाकर द्विवेदी ने फिर याचिका दायर की तो मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई कर प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी को आदेश देकर घोटाला और अनियमितता करने वाले अधिकारियों से वसूली के आदेश दिए हैं। उसके बाद एक बार
फिर रिकार्ड मांगे जा रहे हैं। विभाग के अफसरों के होश उड़े हैं।