इस आपूर्ति प्रक्रिया में अरुणाचल प्रदेश, झारखंड, हरियाणा और छत्तीसगढ़ के वन निगमों ने हिस्सा लिया। सबसे कम रेट डालने वाले अरुणाचल प्रदेश फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन लिमिटेड को पहली खेप में 39,500 साल स्लीपर और 5300 साल एजिंग की आपूर्ति के लिए अधिशासी अभियंता कुंभ मेला की ओर से आर्डर दिए गए। लेकिन, बीते सात मार्च को मुख्य अभियंता विजय कन्नौजिया ने यह कहते हुए अरुणाचल प्रदेश फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन का आर्डर निरस्त कर दिया, कि अभी इसके लिए शासन से स्वीकृति नहीं मिली है।
करीब 90 करोड़ रुपये के साल स्लीपर और साल एजिंग की आपूर्ति के आर्डर निरस्त होने के बाद अंदरखाने उठापटक तेज हो गई है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 के कुंभ में भी अरुणाचल प्रदेश फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन से भी साल स्लीपर और साल एजिंग की आपूर्ति कराई गई थी।
चार राज्यों के वन निगमों की दरें समय से पहले हुईं लीक
प्रयागराज। महाकुंभ के पांटून पुलों के लिए साल स्लीपर और साल एजिंग की आपूर्ति के लिए चार राज्यों के वन निगमों की दरें खुलने से पहले ही लीक हो गई हैं। छत्तीसगढ़ की फर्म घोरमनाथ ट्रेडर्स की ओर से कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद को जनवरी में पत्र लिखे जाने के बाद यह सवाल उठाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि खरीद की दरें खुलने से पहलेे ही इस पत्र में घोरमनाथ ट्रेडर्स ने चारों राज्यों के निगमों के रेट का उल्लेख कर दिया था।
और खुद के लिए आपूर्ति दिए जाने का प्रतिवेदन भी किया है। घोरमनाथ ट्रेडर्स का कहना है कि अगर उसे आपूर्ति मिलती है तो मेला प्राधिकरण को 53.83 करोड़ रुपये की जीएसटी सहित बचत हो जाएगी। उधर, अरुणाचल प्रदेश फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन से जुड़ी फर्मों ने इसकी शिकायत शासन से की है। इसके पीछे घोरमनाथ ट्रेडर्स और पीडब्ल्यूडी के कुछ कर्मचारियों की मिली भगत का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की गई है।
साल स्लीपर और साल एजिंग के आर्डर निरस्त होने की जानकारी अभी मुझे नहीं है। अभी इसकी प्रक्रिया चल रही है। वन निगम से दरें मंगाई गई हैं। आगे क्या होता है देखा जाएगा। - विजय कन्नौजिया, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी