प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के बिल्डर्स को राहत देते हुए उन पर लगाए गए अतिरिक्त कर की वसूली का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने जिन मदों में कर लगाए हैं, वह कानून के तहत मान्य नहीं हैं। प्राधिकरण को नियमविरुद्ध तरीके से टैक्स की वसूली करने का अधिकार नहीं है।
राजनगर एक्सटेंशन एनएच 58 डेवलपर्स एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति विपिन चंद्र दीक्षित ने दिया। एसोसिएशन का कहना था कि उनका 25 बिल्डर्स का एसोसिएशन हैं। जीडीए उनसे एलिवेटेड रोड, मेट्रो स्टेशन, अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो, रेन वाटर हार्वेस्टिंग आदि के लिए अतिरिक्त टैक्स की वसूली कर रहा है। यह गैरकानूनी है, क्योंकि अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। याची बिल्डर्स का एलिवेटेड रोड, मेट्रो स्टेशन निर्माण आदि से कोई लेना देना नहीं है। अतिरिक्त विकास शुल्क के नाम पर टैक्स की वसूली करना गलत है।
याचिका का विरोध कर रहे जीडीए के वकील का कहना था कि एसोसिएशन को याचिका दाखिल करने का अधिकार नहीं है। क्योंकि टैक्स बिल्डर्स पर लगाए गए हैं, जिसके लिए वह व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार हैं। इसके अलावा नक्शा पास करते समय बिल्डर्स ने इन शर्तों को स्वीकार किया था और टैक्स अदा भी कर रहे हैं। इसलिए इस स्तर पर टैक्स वसूली को चुनौती नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने प्राधिकरण की आपत्तियों को खारिज करते हुए टैक्स वसूली का आदेश रद्द कर दिया है।