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जंक्शन भेजी 84 बसें, 149 का संचालन

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गुजरात से आईं तीन एवं पंजाब से आई एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन के यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए रोडवेज द्वारा 184 बसों का इंतजाम बुधवार को किया गया। हालांकि, प्रयागराज जंक्शन के बाहर से इन सभी बसों को चलाने की नौबत नहीं आई। इस दौरान चार ट्रेनों से आए यात्रियों को कुल 149 बसों से प्रदेश के 0 शहरों की ओर रवाना किया गया।
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जंक्शन पर सुबह सूरत से जब पहली ट्रेन आई तो जंक्शन के बाहर 46 बसें रोडवेज द्वारा लगाई गई थी। इस दौरान रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक टीकेएस बिसेन अपने सभी एआरएम एवं वरिष्ठ अफसरों के साथ जंक्शन पर ही मौजूद रहे। उनकी निगरानी में सुबह कुल 38 बसें प्रतापगढ़, जौनपुर, भदोही, सुल्तानपुर आदि जिलों के लिए गईं। इसी तरह जब दूसरी ट्रेन आई तब भी 46 में से 44 बसें प्रदेश के विभिन्न जिलों की ओर रवाना हुईं। दिन में तीसरी ट्रेन लुधियाना से आई। इस दौरान कुल 25 बसों से कौशांबी, प्रतापगढ़ आदि जिलों के लिए यात्री रवाना हो गए। दिन में आखिरी ट्रेन 3:45 बजे सूरत से आई। इस दौरान 42 बसों से प्रदेश के विभिन्न जिलों के लिए श्रमिकों एवं उनके परिजनों को रवाना किया गया। इसके पूर्व वर्कशॉप में सभी बसों को सैनिटाइज किया गया। उसके बाद ही सारी बसें जंक्शन के बाहर लीडर रोड से होते विवेकानंद मार्ग तक एक कतार में खड़ी की गई । रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक ने बताया कि बृहस्पतिवार को भी दो ट्रेनें आ रही हैं इस वजह से जंक्शन के बाहर 100 से अधिक बसों का इंतजाम रहेगा।
जंक्शन पर डटे रहे अफसर
प्रवासी श्रमिकों के आने के दौरान पूरा प्रशासनिक अमला जंक्शन पर मुस्तैद रहा। श्रमिकों को कोई परेशानी न होने पाए तथा कहीं भटकना न पड़े इसके लिए सभी की ड्यूटी तय थी। रेलवे के अफसरों के अलावा डीएम भानुचंद्र गोस्वामी खुद निगरानी कर रहे थे। हर मोर्चे पर एडीएम, एसडीएम स्तर के अफसरों की ड्यूटी तय की गई थी। स्टेशन पर उतरने के बाद श्रमिकों आश्रय स्थल में लाया गया, यहां इन्हें जिलेवार बैठाया गया। इस दौरान चिकित्सीय टीम ने सभी की जांच की। रेलवे से प्राप्त सूची के अनुसार सभी श्रमिकों का विवरण एकत्रित किया गया। आश्रय स्थल में उन्हें भोजन कराया गया। तहसीलदार, नायब तहसीलदारों की अगुवाई में यह पूरी जिम्मेदारी लेखपालों ने निभाई। श्रमिकों के संपर्क में आने वाले सभी कर्मचारी, लेखपाल विशेष ड्रेस में कवर थे।
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होम क्वारंटीन, ग्रामीण-टीम रखेगी नजर
गुजरात और पंजाब से आए प्रयागराज के श्रमिकों को घर पहुंचाने के साथ ही 21 दिनों के लिए क्वारंटीन करा दिया गया है। स्टेशन पर ही सभी की चिकित्सीय जांच कराई गई। अफसरों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में उनकी तबीयत ठीक पाई गई है। इसके बाद उन्हें सीधे गांव ले जाया गया। सभी श्रमिक 21 दिनों तक घर में अलग कमरे में रहेंगे। उनसे सिर्फ परिवार के एक सदस्य से मिलने की अनुमति होगी, जिनके यहां अलग रखने की व्यवस्था नहीं है उन्हें गांव में ही बने आश्रय स्थल में रखा गया है। निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए लेखपालों तथा आशाओं की ड्यूटी लगाई गई है। इनके अलावा भी ग्राम सभा स्तर पर निगरानी समिति बनाई गई है। साथ ही ग्रामीणों से भी अपील की गई कि बाहर से आने वालों पर हर पल नजर रखी जाए। अन्यथा, पूरा गांव खतरे में पड़ सकता है।
श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन शुरू
श्रम विभाग की ओर से बाहर से आने वाले सभी श्रमिकों का विवरण भी तैयार किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर उनके नाम, गांव आदि के अलावा उनके हुनर को भी अंकित किया जा रहा है। अफसरों का कहना है कि इसका मकसद श्रमिकों को उनके हुनर के अनुसार रोजगार देना है। फिलहाल मनरेगा के अंतर्गत भी उनका पंजीकरण शुरू है। इसके तहत श्रमिकों को अपने ग्राम पंचायत में ही काम देने की योजना है। श्रम विभाग की ओर से प्रयागराज में कंट्रोल रूम खोला गया है। हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है। हेल्पलाइन नंबर 7275264640 और 8858002139 पर फोन करके समस्या-शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
आज जाएंगे राजस्थान के मजदूर
मध्य प्रदेश के बाद अब राजस्थान के श्रमिकों को उनके घर भेजने का निर्णय लिया गया है। उन्हें बृहस्पतिवार को बसों से रवाना किया जाएगा। डीएम की ओर से जारी आदेश के अनुसार बसें राणा प्रताप चौराहा से दिन में दो से रात आठ बजे के बीच रवाना होंगी। इच्छुक श्रमिक इस अवधि में उपस्थित होकर अपने घर जा सकते हैं। कंट्रोल रूम के नंबर 0532-2641577, 0532-2641578 तथा मोबाइल नंबर 7458825340 पर संपर्क कर अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
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