मनरेगा के तहत वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराने का अधिकार केवल सक्षम प्राधिकारी को ही है। यह टिप्पणी करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधान व अन्य पर मनरेगा मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग में वार्ड सदस्य की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी।
मनरेगा के तहत वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराने का अधिकार केवल सक्षम प्राधिकारी को ही है। यह टिप्पणी करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधान व अन्य पर मनरेगा मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग में वार्ड सदस्य की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी ने बस्ती जिले की वार्ड सदस्य सुशीला सिंह की याचिका पर दिया है।
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मामला बस्ती के विकास खंड साल्तौवा गोपालपुर के ग्राम पंचायत मझौवा बैकुंठ का है, जहां की निर्वाचित वार्ड सदस्य सुशीला सिंह ने ग्राम प्रधान और अन्य अधिकारियों के विरुद्ध मनरेगा फंड के गबन का आरोप लगाया था।
आरोप था कि प्रधान ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर फर्जी जॉब कार्ड बनवाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। जब मजिस्ट्रेट ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं दिया, तो याची ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर की।
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कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि एफआईआर दर्ज कराने की शक्ति जिला कार्यक्रम समन्वयक को प्रदान है। प्रारंभिक जांच में वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर केवल नामित अधिकारी ही एफआईआर दर्ज कराने के लिए अधिकृत है। इसी के साथ कोर्ट ने दायर पुनरीक्षण अर्जी खारिज कर दी।