फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Prayagraj News: चार बीघा खेत के लिए एक बोरी यूरिया ऊंट के मुंह में जीरा भी नहीं

विज्ञापन
विज्ञापन
यूरिया संकट से जूझ रहे किसान समितियों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं लेकिन उन्हें खाद नसीब नहीं हो रही है। वहीं, साधन सहकारी समिति लक्षनकापूरा में बुधवार को चार बीघा धान की रोपाई करने वाले किसान को छिड़काव के लिए एक बोरी खाद दी गई। किसानों का कहना है कि जिस हिसाब से किसानों को खाद बांटी जा रही है वह ऊंट के मुंह में जीरा भी नहीं है।
विज्ञापन

किसानों ने कहा कि जो 10 बिस्वा का काश्तकार है उसे भी एक बोरी खाद और जो 10 बीघे का है उसे भी एक बोरी ही खाद दी जा रही है। यह न्यायसंगत नहीं है। खाद भी समय पर नहीं मिल रही है, आखिरकार खेती कैसे की जाए। डीएपी और यूरिया के लिए भी मारामारी है।

किसानों का आरोप है कि समितियों के सचिव की मनमानी से किसानों को यूरिया नहीं मिल पा रही है। आरोप है कि रात में वह निजी दुकानदारों को खाद बेच दे रहे हैं। बाजार में किसानों को यूरिया की प्रति बोरी के लिए पांच सौ रुपये देने पड़ रहे हैं।
विज्ञापन

बोले अफसर

मेजा के सुजनी साधन सहकारी समिति में यूरिया उपलब्ध नहीं है। बाकी आठ समितियों में पर्याप्त यूरिया है। किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होने पाएगी। किसानों को निर्धारित मानक के हिसाब से यूरिया दी जा रही है। - सच्चिदानंद दूबे एडीओ कोआपरेटिव मेजा।


बोले किसान
यूरिया के लिए चार दिन से लक्षनकापूरा साधन सहकारी समिति का चक्कर काट रहा हूं लेकिन खाद नहीं मिली। अब खेती करना आसान नहीं रह गया है। -सुरेश तिवारी।
यूरिया वितरण का जो मानक तय किया गया है वह बेहद गलत है। जो दस बीघे का काश्तकार है उसे भी एक बोरी यूरिया और जो दस बिस्वा का काश्तकार है उसे भी एक बोरी यूरिया दी जा रही है। यह बेहद गलत मानक तय किया गया है। इसे बदलने की जरूरत है। -अजय पटेल।
काफी प्रयास के बाद एक बोरी यूरिया मिल सकी है। कैसे चार बीघे धान में यूरिया का छिड़काव किया जाएगा, समझ में नहीं आ रहा है। खाद के लिए दिनभर जूझना पड़ता है। तब भी खाद नहीं मिलती है। -राकेश पाल।
यूरिया के लिए पांच दिन से साधन सहकारी समिति लक्षनकापूरा का चक्कर काट रहा हूं। आज किसी तरह से एक बोरी यूरिया मिल सकी है। पांच बीघे धान की फसल में कैसे यूरिया का छिड़काव किया जाए। -अशोक कुमार यादव।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें