सवाल : वेब सीरीज के कलाकारों का चयन कैसे किया गया?
मुंबई में कलाकारों का ऑडिशन कराया गया। इसके बाद कहानी और पात्रों की जरूरत के अनुसार कलाकारों का चयन किया गया। हमने कोशिश की कि हर किरदार वास्तविक लगे और छात्रों की भावनाओं को सही तरीके से पेश कर सके।
सवाल : इस वेब सीरीज को लेकर छात्रों से कैसी प्रतिक्रिया मिली?
प्रतिक्रिया बेहद सकारात्मक रही है। छात्र मृदुल ने कहा कि ‘वन मोर टाइम’ का संदेश किसी भी विद्यार्थी को सदमे और निराशा से बाहर निकाल सकता है। कई छात्रों ने बताया कि यह सीरीज उन्हें दोबारा मेहनत करने और उम्मीद बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
सवाल : जब लाखों छात्र निराश थे, तब आपने विरोध के बजाय कैमरे के जरिये अपनी बात रखने का फैसला क्यों किया?
उस समय बहुत लोग सोशल मीडिया पर अपनी बात रख रहे थे लेकिन वह चर्चा कुछ समय बाद खत्म हो जाती है। मैं ऐसा माध्यम चुनना चाहती थी जो लंबे समय तक लोगों तक पहुंचे। इस वजह से वेब सीरीज बनाई। मेरा संदेश साफ है कि परीक्षा दोबारा दी जा सकती है लेकिन जिंदगी दोबारा नहीं मिलती। किसी भी असफलता या झटके के बाद उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।
प्रयागराज से मुंबई तक का सफर
धूमनगंज के मीरापट्टी क्षेत्र की रहने वाली अमृषा गौतम की प्रारंभिक शिक्षा राजकीय बालिका इंटर कॉलेज से हुई। उन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय से बीएससी की पढ़ाई की। इसके बाद थिएटर की दुनिया में कदम रखा। वर्ष 2018 में उन्हें पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर आधारित बायोपिक में काम करने का अवसर मिला। इसके बाद वह मुंबई में सक्रिय हो गईं।
सात एपिसोड की है ‘वन मोर टाइम’
अमृषा ने बताया कि ‘वन मोर टाइम’ सात एपिसोड की वेब सीरीज है। इसे इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक पर देखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में मयंक और निखिल ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। छोटी बहन और नानी ने हमेशा उत्साह बढ़ाया।