यहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण
पूर्ण चंद्र ग्रहण को भारत के अलावा इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी और इटली समेत यूरोप के कई देशों में देखा जा सकेगा। यह अफ्रीका के अधिकांश देशों, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी दिखाई देगा।
सूतक काल क्या है
आचार्य गोपालजी मालवीय बताते हैं कि सूतक काल ग्रहण शुरू होने से पहले का समय होता है, जिसमें पूजा-पाठ, खाना बनाना या शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। ग्रहण से पहले के अशुभ समय को सूतक काल कहा जाता है। धार्मिक और शास्त्रीय दृष्टि से इस काल को महत्वपूर्ण माना जाता है। चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से नौ घंटे पहले शुरू हो जाता है।
सूतक काल के नियम
1. इस अवधि में बिना स्नान किए खाना-पीना, शौच-पेशाब करना और पूजा-पाठ करना वर्जित है।
2. गर्भवतियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ सकता है।
3. धार्मिक शास्त्रों के अनुसार इस दौरान जप-तप, पाठ और ध्यान बहुत फलदायी होते हैं।
4. भोजन पर तुलसी, कुश या दूर्वा के पत्ते रखने से वह ग्रहण के दोष से मुक्त रहता है।
ग्रहण समाप्ति के बाद यह विधान
1. चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।
2. घर में गंगाजल छिड़कें। मंदिर की सफाई-धुलाई के बाद देवी-देवताओं की पूजा करें।
3. चंद्र ग्रहण पितृ पक्ष के पहले दिन है, इसलिए पूर्वजों के नाम पर दान अवश्य करना चाहिए।
राशि से जानिए आपके लिए कैसा रहेगा चंद्र ग्रहण
मेष राशि : लाभ होगा, सामाजिक बंधनों के तले दबाव महसूस करेंगे। ॐ नमः शिवाय का जप करें।
वृषभ राशि : सुख मिलेगा, किसी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति से टकराव हो सकता है। पार्टनर या पत्नी से विवाद, ॐ श्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः का जप करें।
मिथुन राशि : मान-सम्मान में कमी, मानसिक बेचैनी एवं लोगों से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें।
कर्क राशि : मृत्यु तुल्य कष्ट, भावनात्मक उथल-पुथल एवं अपने अंदर के डर से बचें। ॐ गं गणपतये नमः इस मंत्र का जप करें।
सिंह राशि : स्त्री पीड़ा, स्त्री का सम्मान करें, शांति बनाए रखें। महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
कन्या राशि : सौभाग्य वर्धक, छुपे विरोधी सामने आ सकते हैं टकराव से बचें। ॐ हनु हनुमते नमः मंत्र का जप करें।
तुला राशि : चिंता, प्रेम और सौहार्द बनाए रखें। ॐ क्लीं कृष्णाय नमः मंत्र का जप करें।
वृश्चिक राशि : व्यथा, घर के माहौल में भावनात्मक उतार चढ़ाव या वाद विवाद हों सकता है संतुलन बनाए रखें। ॐ नमो नारायण नमः मंत्र का जप करें।
धनु राशि : श्री प्राप्ति, भाई बहनों अथवा पड़ोसियों से विवाद से बचें। ॐ सरस्वत्यै नमः मंत्र का जप करें।
मकर राशि : हानि, कोई बड़ा खर्च या बड़ी खरीदारी रोक दें, आर्थिक संतुलन बनाए रखें। ॐ श्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का जप करें।
कुंभ राशि : घात, गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें, सत्य के रास्ते चलें। ॐ नम: शिवाय का जप करें।
मीन राशि : हानि, भावनात्मक अलगाव, अधिक खर्च से बचें। ॐ बृंद बृहस्पतये नमः इस मंत्र का जप करें।