बता दें मिशन रफ्तार के तहत दिल्ली-हावड़ा रूट पर ट्रेनों की अधिकतम स्पीड 160 किमी प्रतिघंटा की जानी है। इसके लिए इस ट्रैक को कवच से लैस किया जा रहा है। दिल्ली-हावड़ा रूट के गाजियाबाद-पंडित दीन दयाल उपाध्याय सेक्शन पर बाउंड्रीवॉल भी बनाई जा रही है। 80 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा कुछ अन्य तकनीकी कार्य भी अब अंतिम चरण में है।
नैनी रेल पुल का स्ट्रक्चर 160 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों के लिए फिट है। मिशन रफ्तार के तहत गाजियाबाद-पंडित दीन दयाल उपाध्याय सेक्शन पर ट्रेनों की अधिकतम गति 160 किमी प्रतिघंटा होनी है। - शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ, एनसीआर
नैनी रेल ब्रिज से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- इस पुल से आज भी रोज तकरीबन 200 ट्रेनों की आवाजाही होती है।
- ब्रिटिश इंजीनियर सिवले की देखरेख में बने इस पुल पर रेल आवागमन 15 अगस्त 1865 को शुरू हुआ था।
- 3150 फीट लंबे इस पुल का तब 44 लाख 46 हजार 300 रुपये में निर्माण हुआ था।
- 14 पिलर पर बने नैनी यमुना पुल का पूरा स्ट्रक्चर ठोस लोहे का है।
- वर्ष 1859 में पुल बनाने का कार्य शुरू हुआ था जो छह वर्ष में पूरा हुआ था।
- यमुना के तेज बहाव के चलते पुल के एक पिलर की डिजाइन हाथी पांव जैसी है।
- वर्ष 1913 में नैनी पुल पर बिछाई गई थी दूसरी लाइन, 1929 में हुई पुल की रीगार्डरिंग।