रेती पर कुछ इस तरह बिछाए गए हैं चकर्ड प्लेट।
- फोटो : अमर उजाला।
त्रिवेणी और काली पांटून पुलों पर कई जगह क्लैंपिंग टूटने से चकर्ड प्लेटें मुड़कर उखड़ गई हैं। इससे वाहनों के बंफर टूटने के साथ हादसे की आशंका बनी हुई है। मेला नजदीक आने के साथ अस्थाई कार्यों में बदइंतजामी सिर चढ़कर बोलने से चिंता बढ़ गई है। हेतापट्टी के भोलानाथ पांडेय को मेला कार्यालय जाने के लिए पांच बार रास्ता बदलना पड़ा। वह साइकिल से घंटों भटकते रहे। उनके मुताबिक, समयामाई समेत पांच पुलियां बंद होने से उन्हें दूसरे रास्तों पर भेज दिया गया।
राधा सत्संग समिति के शिविर के प्रबंधक पीसी शुक्ला ने बताया कि संगम लोवर मार्ग, मुक्ति मार्ग, हरिश्चंद्र मार्ग, तुलसी मार्ग, ओल्डजीटी मार्ग समेत अन्य रास्तों पर नाममात्र की बालू डालकर चकर्ड प्लेटें बिछाई गई हैं। बिना क्लैंपिंग के लगी कई जगह चकर्ड प्लेटें उठी हुई हैं। इससे लोग चोटिल भी हो रहे हैं। वाहनों को भी नुकसान पहुंच रहा है।
निर्माणाधीन पांटून पुल।
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आधा दर्जन पांटून पुलों-पुलियों का निर्माण बाकी
आधा दर्जन से अधिक पांटून पुलों का निर्माण अभी तक नहीं हो सका है। सोमेश्वर महादेव के पास से संगम को जोड़ने वाले पुल नंबर-एक का निर्माण नहीं हो सका है। पुल संख्या तीन, चार, पांच और छह का भी निर्माण अभी अधूरा है।