पुरानी करेंसी अब कमीशन पर बिकने लगी है। काली कमाई को सफेद करने के लिए पांच सौ, एक हजार के नोट 20 से 30 फीसदी कमीशन पर बेचे जा रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है। चर्चा है कि बैंक के कुछ कर्मचारियों और व्यापारियों की मिलीभगत से यह काम हो रहा है। कई बैंक मित्र और कुछ अफसर भी इसमें शामिल हैं।
नोटबंदी के बाद पांच सौ और हजार के नोट मोटा कमीशन लेकर बदले जाने का सिलसिला लगातार जारी है। जैसे-जैसे इन नोटों के चलन को पूरी तरह से प्रतिबंधित किए जाने की तारीख नजदीक आ रही है, इन्हें बेचने के लिए कमीशन भी तेजी से बढ़ रहा है। शुरुआत में पांच से दस फीसदी देकर पुराने नोट के बदले नए नोट हासिल कर लिए जा रहे थे लेकिन अब इसके लिए 20 से 30 फीसदी तक कमीशन देना पड़ रहा है। काली कमाई रखने वाले जानते हैं कि अगर अघोषित कमाई को 50 फीसदी टैक्स देकर बैंक में जमा कर दिया तो उनका कई तरह से नुकसान होगा।
अव्वल तो आयकर विभाग की नजर उन पर टेढ़ी हो जाएगी और फौरी तौर पर महज 25 फीसदी रकम ही हाथ जाएगी। ऐसे में बेहतर है कि 20 से 30 फीसदी कमीशन देकर पुराने नोट ठिकाने लगा दिए जाएं। सूत्रों के मुताबिक पुराने शहर के कई बडे़ व्यापारियों की कई निजी और सरकारी बैंकों में अफसरों एवं कर्मचारियों से तगड़ी सेटिंग है। कुछ व्यापारी और बिचौलिए बैंक कर्मियों से मिलीभगत कर मोटा कमीशन लेकर पांच सौ और हजार के नोट के बदल रहे हैं। शहर में कई ऐसे बिल्डर, डॉक्टर और व्यापारी हैं, जिनकेपास पुरानी नोट में लाखों, करोड़ों की रकम है। ऐसे लोग इन बिचौलियों के जरिए 20 से 30 प्रतिशत तक कमीशन देकर नोट बदलवा रहे हैं।
कमीशन पर पुराने नोट बदले जाने खेल सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस पर रोक के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं और जांच कराकर कार्रवाई की जाए। समिति के संयोजक संतोष पानामा कहना है कि आम जनता और व्यापारी बैंकों के बाहर लाइन में लगे हैं। उन्हें खाली हाथ लौटाया जा रहा है और बिचौलियों को बेरोकटोक पैसा मिल जा रहा है। उनकी मांग है कि कमीशन पर पुरानी करेंसी बेचने और खरीदने वालों को सरकार जेल भेजे।