Old AUSU member is ready to contest student council election.
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प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में छात्र परिषद का चुनाव लड़ने के लिए कई पुराने पदाधिकारी भी तैयार हैं लेकिन, वे चुनाव लड़ सकेंगे या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा कई ऐसे छात्र भी हैं जो पहले किसी दूसरे कॉलेज के छात्रसंघ के पदाधिकारी थे और अब उन्होंने इविवि में प्रवेश ले लिया है। ऐसे छात्र नेताओं ने भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रखी है।
छात्र परिषद के विरोध में चल रहा आंदोलन अचानक धीमा हो गया है। इससे पूर्व जो आंदोलन हुए, उनके शामिल छात्र नेताओं के खिलाफ इविवि प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की। अगर किसी छात्र पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है या मुकदमा दर्ज होता है तो वह छात्र परिषद का चुनाव नहीं लड़ सकेगा। चर्चा है कि बहुत से छात्र नेता अब इस तरह की कार्रवाई से बचना चाहते हैं ताकि छात्र परिषद का चुनाव लड़ सकें।
इविवि में छात्र परिषद का पहला चुनाव होगा। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों में प्रावधान है कि छात्र एक बार से अधिक चुनाव लड़ सकते हैं लेकिन, कुछ पुराने पदाधिकारी इस तर्क के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी में बैठे हैं कि पहली बार छात्र परिषद का चुनाव होने जा रहा है। ऐसे में छात्र परिषद के प्रमुख पदों का चुनाव एक बार लड़ने के नियम का उल्लंघन नहीं हो रहा है।
इसके अलावा कॉलेज के भी कई छात्रों ने पिछले साल और इस बार भी इविवि में दाखिला लिया है। इनमें से कुछ छात्र कॉलेजों के छात्रसंघ के पदाधिकारी रह चुके हैं या प्रमुख पदों के लिए चुनाव लड़ चुके हैं। उनके लिए भी छात्र परिषद पहला चुनाव होगा और वे अब चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। हालांकि इस बाबत नियम अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं। ऐसे में पूर्व में इविवि और कॉलेजों में छात्रसंघ का चुनाव लड़ चुके छात्र नेताओं एवं पदाधिकारियों का झटका भी लग सकता है।