तीन वर्ष से जिले में और सात वर्ष से मंडल में पांव जमाए अफसरों को अब तबादले का डर सताने लगा है। वह लखनऊ में अपने चहेतों के लगातार चक्कर लगा रहे हैं। साथ ही नेताओं से तबादले से जुड़ी पैरवी करा रहे हैं। इस दौरान वह अपने दफ्तरों में नहीं बैठ रहे हैं। वहीं, विभाग में अफसरों के नहीं बैठने पर शिकायत लेकर आने वाले लोगों को धूप में परेशान होना पड़ रहा है।
स्थानांतरण सूची पर गौर करें तो पीडीए, कलक्ट्रेट, नगर निगम, मंडलीय कार्यालयों, निदेशालयों सहित कई अधिकारियों के स्थानांतरण का आदेश आ चुका है। अगर, शासन के नियमों का पालन हुआ तो करीब 100 से ज्यादा अफसर इधर से उधर हो सकते हैं। जिस वजह से वह अक्सर गायब रहते हैं। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने कहा, शासन की नीति के तहत स्थानांतरण होना है। तैनाती का ब्योरा अभी नहीं मांगा गया है।
केस एक
समाज कल्याण विभाग के एक मंडलीय अधिकारी अपने स्थानांतरण को लेकर काफी परेशान हैं। इन दिनों वह ऑफिस में कभी-कभार ही बैठ रहे हैं। वह लखनऊ से लेकर सत्ताधारी दल के नेताओं से पैरवी करवा रहे हैं। ताकि स्थानांतरण रुक जाए। वह मंडल में करीब 16 वर्ष से जमे हैं।
केस दो
जिले के शिक्षा विभाग में एक अफसर चार साल से जमे हैं। हाल ही में उनकी शिकायत मुख्यमंत्री से की गई। कारण, मानव संपदा पोर्टल पर उन्होंने अपनी संपत्ति के ब्योरे में एक प्रापर्टी का जिक्र नहीं किया था। अब वह लखनऊ में अपने चहेतों से मिलकर स्थानांतरण से जुड़ी सेटिंग लगा रहे हैं। केस तीन
पीडीए में एक अफसर करीब चार साल से तैनात हैं। स्थानांतरण के डर से वह अपने संपर्क सूत्रों से लगातार मिल रहे हैं। ताकि वह स्थानांतरण के झमेले से बच सकें।