इलाहाबाद। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन आदि के कारोबारियों को देश में निवेश की अपील कर रहे हैं। इसके तहत टैक्स की जटिलता खत्म करने की बात की जा रही है लेकिन प्रदेश के व्यापारी टैक्स की जटिलताओं और अफसरों की मनमानी से परेशान हैं। अब वाणिज्य कर विभाग के खंडों में तैनात अफसरों की तानाशाही व्यापारियों पर भारी पड़ रही है। खंड के अधिकारी रजिस्टर्ड व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर जाकर सर्वे के नाम पर जांच कर रहे हैं, जबकि बिक्री कर व्यवस्था के दौरान से ही रजिस्टर्ड व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर सर्वे करने पर रोक है। इसे लेकर व्यापारी एक बार फिर बड़े आंदोलन की तैयारी में हैं।
इन दिनों खंडों में तैनात अफसर विभाग में रजिस्टर्ड व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर अचानक पहुंच जा रहे हैं। सर्वे के नाम पर कागजों, माल की जांच की जाती है। फिर अनाप-शनाप नोटिस भेजा जाता है। इस तरह के लगातार हो रहे सर्वे से व्यापारियों में नाराजगी बढ़ रही है। इसके पहले बिक्री कर व्यवस्था में रजिस्टर्ड व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर सर्वे किए जाते थे। विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) अफसर प्रतिष्ठानों जाकर जांच करते थे। व्यापारियों ने उत्पीड़न का आरोप लगाकर उस दौरान इसका जबरदस्त विरोध किया। 90 के दशक में इस मामले को लेकर लखनऊ में व्यापारियों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन उग्र होने पर कई व्यापारियों की जान भी चली गई।
इसके बाद शासन ने प्रतिष्ठानों के सर्वे पर पूरी तरह रोक लगा दी। व्यापार कर व्यवस्था में भी सर्वे पर प्रतिबंध था। आदेश था कि विशेष परिस्थितियों या फिर कर चोरी की जानकारी होने पर ही सर्वे किए जाएं लेकिन वर्तमान में अफसरों ने आदेश को दरकिनार कर रजिस्टर्ड व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा और अध्यक्ष सतीश चंद्र केसरवानी का कहना है कि खंड के अधिकारी सर्वे के नाम पर मनमानी पर उतारू हैं। कर निर्धारण अधिकारियों से इस रवैये से व्यापारियों का उत्पीड़न हो रहा है। इस मामले में वाणिज्य कर कमिश्नर से शिकायत की गई है। जल्द ही विभिन्न व्यापारिक संगठनों के साथ बैठक कर सर्वे के खिलाफ आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।