हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद संगम के आसपास से गंगा जल का नमूना नहीं लिया जा रहा है। फैक्ट्रियों और टेनरियों का प्रदूषित पानी भी गंगा में गिर रहा है। एसटीपी की स्थिति भी ठीक नहीं है। यह आरोप लगाया है कि समाजसेवी एवं एनजीआरबीए जिला अनुश्रवण समिति के सदस्य कमलेश सिंह ने। उनका कहना है कि हाईकोर्ट में चल रही जनहित याचिका में कमिश्नर, डीएम, जल निगम के जीएम, कानपुर के डीएम एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संयुक्त टीम गठित कर जांच का आदेश दिया था लेकिन अधिकारी सिर्फ बैठकें कर के निर्देश दे रहे हैं। निर्देश का पालन भी नहीं हो रहा।
बताया कि शनिवार को उन्होंने जनहित याचिका के अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव, देवेंद्र तिवारी एवं बीरेंद्र कुमार पांडेय के साथ दारागंज से लेकर गोविंदपुर तक निरीक्षण किया। दारागंज सब्जी मंडी, हरी मस्जिद, बख्शी कला, एवं बख्शी खुर्द, नागवासुकि मंदिर के पीछे, सलोरी, छोटा एवं बड़ा बघाड़ा, ढरहरिया, गोविंदपुर के अलावा रसूलाबाद, मेहंदौरी आदि से नालों के जरिए प्रदूषित पानी सीधे गंगा में जा रहा है। इसकी वजह से गंगा जल कहीं काला तो कहीं लाल हो गया है। उन्होंने सलोरी एसटीपी का भी निरीक्षण किया लेकिन 24 घंटे बिजली न होने के कारण समस्या हो रही है। उनका कहना है कि अफसर गंगा प्रदूषण के मामले में जरा भी गंभीर नहीं हैं। उन्होंने बताया कि निरीक्षण रिपोर्ट फोटो के साथ न्यायालय में पेश की जाएगी।