महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर में तो परंपरा एवं आधुनिकता का संतुलित संगम दिखा, लेकिन कई दूसरे अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में यह देखने को नहीं मिलता। वहां भारतीय संस्कृति पर बल नहीं दिया जाता। वहां हम अपनी संस्कृति से दूर मिशनरी संस्कृति अपनाने के लिए बाध्य हो जाते हैं। ये बातें प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने शनिवार को आयोजित महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर वार्षिकोत्सव में कही।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यद्यपि वह भी ऐसे ही विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करके वर्तमान पद पर हैं, फिर भी जब इस विद्यालय का परिवेश देखते हैं तो मन में कसक होती है। बतौर मुख्य अतिथि सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि हमारे प्रदेश में जो भी सरकारें आईं, उसमें शासन करने वाले भूल गए कि शिक्षा को कितना महत्व देना चाहिए। किसी भी सरकार को व्यवसाय के मुकाबले शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देना चाहिए और वर्तमान सरकार यही कर रही है। कहा कि नेहरू और इंदिरा की सरकार ने शुरुआत में अच्छा काम किया लेकिन शिक्षा प्रणाली कम्यूनिस्टों के हाथ सौंप दी।
कम्यूनिस्टों ने चाइना और रूस की शिक्षा प्रणाली को सही मानकर यहां भी उसे लागू कर दिया और हमारी संस्कृति को भूल गए। उन्होंने खेलकूद पर विशेष ध्यान देने को कहा। साथ ही भरोसा दिलाया कि विद्यालय को क्रीड़ा के क्षेत्र में विस्तार के लिए भूमि दिलाने का प्रयास करेंगे। इससे पूर्व मुख्य अतिथि समेत विशिष्ट अतिथि डीएम सुहास एलवाई, सचिव प्रो. कृष्णा गुप्ता एवं प्रधानाचार्य सुष्मिता कानूनगो ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। रंग-बिरंग और आकर्षक परिधानों में नन्हें विद्यार्थियों ने अतिथि का अभिनंदन किया। विद्यार्थियों ने गीत प्रस्तुत कर स्कूल के संस्थापक लोकमणिलाल के संपूर्ण व्यक्तित्व को मुखरित किया। साथ ही सर्वशिक्षा प्राथमिक विद्यालय की उमंग से भरी प्रस्तुति नुक्कड़ नाटक ने सभी का दिल जीत लिया। विद्यालय समिति के निदेशक मधुकर गुणे ने आगंतुकों को धन्यवाद ज्ञापित किया।