पीएम-सीएम व गृहमंत्री की आपत्तिजनक तस्वीर वायरल होने के मामले में एक और खुलासा हुआ है। पता चला है कि यह तस्वीर सीएए-एनआरसी के विरोध में पिछले साल शहर में हुए प्रदर्शन के दौरान खिंचवाई गई थी। तस्वीर में दिख रहे युवक ने इस बात का खुलासा तब किया जब जेल के भीतर उससे पूछताछ की गई। इसके बाद डीजी जेल की ओर से भी बताया गया कि तस्वीर जेल के भीतर की नहीं है।
सोशल मीडिया पर एक दिन पहले तस्वीर वायरल होने के बाद हडक़ंप मच गया था। इसमें एक युवक पोस्टर लिए नजर आ रहा है जिसमें पीएम-सीएम व गृहमंत्री के साथ ही दो अन्य लोगों की तस्वीरें हैं। खास बात यह कि सभी पांच तस्वीरों पर क्रॉस का निशान बनाया गया है। जो तस्वीर वायरल हुई वह हस्सन चकिया के नाम से बने फेसबुक अकाउंट पर अपलोड की गई थी। इसी का स्क्रीनशॉट वायरल हुआ। खास बात यह कि घर पर चढक़र फायरिंग के मामले में कुछ दिन पहले ही आरोपी सरेंडर कर जेल गया था। पुलिस अफसरों का कहना है कि स्क्रीन शॉट वायरल किया गया लेकिन इसका लिंक अब तक नहीं मिल सका है। जांच पड़ताल की जा रही है।
डीजी जेल ने ट्वीट कर दी जानकारी
उधर मामले की जानकारी के बाद जेल अफसरों ने भी जांच कराई। नैनी जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक की ओर से जांच कर डीजी जेल को रिपोर्ट भेजी गई। जिसमें बताया गया कि हस्सन चकिया आठ जुलाई को हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में दर्ज मामले में सरेंडर कर जेल में आया था। वायरल तस्वीर के बाबत पूछने पर उसने बताया कि यह तस्वीर सीएए-एनआरसी प्रदर्शन के दौरान उसके दोस्त ने खींची थी। लेकिन आठ जुलाई के उपरांत न तो उसने न तो प्रसारित किया और न अपलोड किया। उधर डीजी जेल आनंद कुमार की ओर से भी ट्वीट कर जानकारी दी गई कि विवादित तस्वीर 31 मई से ही सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, ऐसे में साफ है कि इसे जेल के भीतर से जारी नहीं किया गया।