अभ्यर्थियों ने आयोग के सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि परीक्षा के लिए कई ऐसे व्यक्तियों ने भी आवेदन किए हैं, जो विज्ञापन में निर्धारित अनिवार्य अर्हता ‘किसी राजकीय कार्यालय या विश्वविद्यालय के कार्यालय में न्यूनतम सात वर्ष कार्य करने का अनुभव’ को धारित नहीं करते हैं। आवेदन करने वाले ऐसे व्यक्ति प्रदेश के उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा के अंतर्गत संचालित शिक्षण संस्थानों में अध्यापन कार्य कर रहे हैं।
इन शिक्षकों की ओर से अपने प्राचार्य/प्रधानाचार्य/हेड मास्टर या अन्य संबंधित अधिकारियों से न्यूनतम सात वर्ष के कार्य अनुभव का प्रमाण पत्र प्राप्त कर संलग्न किया गया है, जो विज्ञापन की शर्तों के विपरीत है। इनको कार्यालय पद्धति व लेखा नियमों का अनुभव नहीं है। इनकी कार्य पद्धति भी राजकीय व विश्वविद्यालय के कार्यालयों में कार्य कर रहे कर्मचारियों से भिन्न प्रकार की है।
इनके अतिरिक्त ऐसे भी आवेदन किए गए हैं, जिनकी नियुक्ति सिर्फ फील्ड के कार्यों के संपादन के लिए फील्ड में ही की जाती है। यह दावा भी किया गया है कि संविदा कर्मियों, आउटसोर्सिंग व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की ओर से भी सहायक कुलसचिव पद के लिए आवेदन किए गए हैं, जो विज्ञापन में उल्लिखित अनिवार्य अर्हता को पूरी नहीं करते हैं।