याचीगण ने दलील दी कि उन्होंने नर्सरी प्रशिक्षण प्रमाण पत्र को उसी तरह से हासिल किया है, जैसे दो वर्षीय बीटीसी या दो वर्षीय उर्दू बीटीसी पाठ्यक्रम है। दावा किया कि यह प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, प्रारंभिक शिक्षा में डिप्लोमा के बराबर है और बीटीसी के बराबर भी। लिहाजा, वह भी इसके लिए न्यूनतम पात्रता रखते हैं।
सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि याचीगण ने ऑनलाइन फॉर्म में बीटीसी उत्तीर्ण बताते हुए आवेदन किया था, जबकि उन्होंने बीटीसी कभी किया ही नहीं। यह धोखाधड़ी की गई। चूंकि न्यूनतम पात्रता बीटीसी उत्तीर्ण थी, जो याचीगण नहीं हैं। इसी के साथ कोर्ट ने याचीगण की अर्जियां खारिज कर दीं।