इलाहाबाद। संगम में मछलियों, साइबेरियन पक्षी और कबूतर के बाद रविवार को कछुआ मरा मिला। नदी में लगातार हो रही पक्षियों की मौतों को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लिए गए जल के नमूनों में बीओडी और डिजाल्व आक्सीजन (डीओ) की मात्रा मानक से अधिक है। बोर्ड के अफसर कह रहे हैं कि पानी में प्रदूषण नहीं है, बावजूद इसके मछलियां, साइबेरियन पक्षी और कबूतर के बाद अब कछुआ कैसे मरा, यह सवाल बना हुआ है।
रविवार को सुबह संगम पर गंगा किनारे कछुआ मरा मिला। मौके पर मौजूद समाजसेवी कमलेश सिंह ने इसे नगर निगम के कर्मचारियों को सौंपा। उन्होंने नदी में प्रदूषण के साथ संदिग्ध गतिविधियों का अंदेशा भी जताया। इसके पीछे उन्होंने कारण बताया कि अब तक जितने भी पक्षियों, मछलियों की मौतें हुई हैं, सभी के शव भोर में ही मिले हैं। दिन में कहीं भी मछली, पक्षियों के मरने की खबर नहीं मिली है। कमलेश सिंह काफी समय से रात में संगम तट पर निगरानी की मांग कर रहे हैं। इस बीच रविवार को मृत कछुआ मिलने की सूचना उन्होंने कमिश्नर और डीएम को दी। बताया कि कमिश्नर ने डीएम से इसकी जांच कराने का आश्वासन दिया है।
नगर निगम ने रविवार को संगम क्षेत्र में सफाई अभियान चलाया। इस दौरान संगम नोज सहित किला घाट मार्ग और हनुमान मंदिर सहित आसपास के क्षेत्र में सफाई कराई गई। नगर आयुक्त आरपी सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीके सिंह के नेतृत्व में सफाई कर्मी सुबह सात बजे संगम पहुंचे। सफाई की शुरुआत संगम नोज से हुई। यहां से भारी मात्रा में गंदगी हटाने के बाद दस्ते ने किला घाट से हनुमान मंदिर तक सफाई की। मंदिर के आसपास से भी बड़ी मात्रा में कूड़ा निकाला गया। करीब चार घंटे चले अभियान में बड़ी-छोटी 15 गाड़ियों में भरकर कूड़ा बसवार प्लांट भेजा गया।