प्रयागराज। अभ्यर्थियों ने तो पीसीएस प्री परीक्षा तो दे दी, अब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पैनल में शामिल विशेषज्ञों की बारी है। पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा की उत्तरकुंजी जारी होते के बाद पता चलेगा कि आयोग के विशेषज्ञ इस परीक्षा में सफल हुए या नहीं। पिछली कई परीक्षाओं में गलत सवाल पूछे जाने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं और हर बाद अभ्यर्थियों को कोर्ट की शरण में जाना पड़ा।
पीसीएस में गलत सवाल पूछे जाने की परंपरा सी चल पड़ी है। पीसीएस-2015, 2016, 2017 और 2018 की प्रारंभिक परीक्षा इसका उदाहरण हैं। हर बार प्रारंभिक परीक्षा की उत्तरकुंजी जारी होने के बाद मामला न्यायालय पहुंचा। पीसीएस 2016 में तो हाईकोर्ट ने गलत सवाल को बदलकर संशोधित रिजल्ट जारी करने का आदेश दिया था। हालांकि में आयोग ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी और वहां से आयोग को राहत मिल गई थी। पीसीएस-2018 में तो आयोग को प्रारंभिक परीक्षा की दो बार संशोधित उत्तरकुंजी जारी करनी पड़ी।
जब भी इस तरह का विवाद सामने आया, हर बार आयोग के पैनल में शामिल विशेषज्ञों पर उंगली उठी। यही आरोप लगते रहे कि आयोग अपने पैनल में सुधार नहीं कर रहा है। इस बार पीसीएस-2019 की प्रारंभिक परीक्षा का पेपर स्तरीय रहा। विषय विशेषज्ञों ने भी माना कि पेपर सेटिंग में काफी सुधार देखने को मिला है और यह संकेत हैं कि आयोग ने अपने पैनल में बदलाव किया है। हालांकि उत्तरकुंजी आने तक अंतिम तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता। अंतरिम उत्तरकुंजी जारी होने के बाद आपत्तियां मांगी जाएंगी और इसके बाद प्री के रिजल्ट के साथ अंतिम उत्तरकुंजी जारी की जाएगी। अगर इस पूरी प्रक्रिया में कोई विवाद नहीं हुआ तो आयोग के विशेषज्ञ भी इस बार की परीक्षा में पास हो जाएंगे।