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अब खुली अदालत में सुनवाई चाह रहे वकील

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हाईकोर्ट द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मुकदमों की सुनवाई की योजना वकीलों को रास नहीं आ रही है। तमाम अधिवक्ता अब खुली अदालत में सुनवाई की मांग करने लगे हैं। भले ही यह सीमित संख्या और सोशल डिस्टेंकिंग का पालन करते हुए हो। वकीलों का कहना है कि अतिआवश्यक मुकदमों की सुनवाई वीडियो लिंक न मिल पाने के कारण नहीं हो पा रही है और कोर्ट को मजबूर होकर मुकदमे में तारीख देनी पड़ रही है। इससे अदालत का समय बर्बाद हो रहा है।
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हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजेश सिंह, एनके चटर्जी, संतोष कुमार मिश्र, बैजंत कुमार मिश्र, राजीव शुक्ला, ऋतेश श्रीवास्तव, दिलीप पांडेय सहित तमाम अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश से मांग की कि अति अत्यावश्यक मुकदमों की खुली अदालत में सुनवाई की व्यवस्था की जाए। ऐसा कर केवल उन्हीं अधिवक्ताओं को कोर्ट में आने की अनुमति जाए, जिनके मुकदमे कोर्ट के समक्ष लगे हुए हैं। सीमित संख्या में खुली अदालत में मुकदमे लगा कर सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालन करते हुए अदालत को खोलने की व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे आम अधिवक्ताओं को अपने मुकदमों में परंपरागत न्याय प्रक्रिया के तहत बहस करने और वादकारियों को न्याय दिलाने का रास्ता सुलभ हो सकेगा। वकीलों में इस बात को लेकर चर्चा है कि जब पुलिस-प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग एवं अन्य विभाग सड़क पर सेवा में लगे हुए हैं, तो अदालतों को अतिआवश्यक मामलों की सुनवाई खुली अदालत में करने में क्या दिक्कत है। आम अधिवक्ता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सहज रूप से बहस करने में सक्षम नहीं हैं। सवाल उठ रहा है कि खास वकीलों के लिए यह व्यवस्था अपनाई गई है, जिसको लेकर आम वकीलों में असंतोष है। वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर से अनुरोध किया कि सीमित संख्या में ही सही, चैंबर्स के बजाय खुली अदालत में मुकदमों की सुनवाई की जाए, ताकि आम अधिवक्ता भी अपने मुकदमों में बहस कर वादकारी को न्याय दिलाने में सफल हो सके।
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