शहर में यातायात जाम और अनियमित पार्किंग से निपटने में यदि लापरवाही की तो इस बार अफसर नपेंगे। हाईकोर्ट ने यातायात जाम की विकराल होती जा रही समस्या से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने का निर्देश दिया है, साथ ही नगर आयुक्त, एसपी यातायात और एडीए के उपाध्यक्ष को सीधे तौर पर इसके लिए जिम्मेदार बनाया है। कहा है कि यदि समस्या से निपटने के लिए उनके द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन में कोताही की गई तो अदालत इन अधिकारियों को सीधे जिम्मेदार ठहराने पर बाध्य होगी।
अशोक कुमार की जनहित याचिका के जरिए शहर में स्वच्छता, यातायात और पर्यावरण की मॉनीटरिंग कर रही न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने नगर आयुक्त, एसपी यातायात और एडीए उपाध्यक्ष की संयुक्त टीम बनाकर 27 मई 2016 को इस संबंध दिए गए निर्देशों का पालन करने का आदेश दिया है। डीएम और एसएसपी को इन अधिकारियों को हर संभव मदद देने के लिए भी कहा है।
कोर्ट में एसपी यातायात द्वारा दिए गए हलफनामे में कहा गया कि मई से जुलाई के बीच 8066 वाहनों का चालान किया गया है जबकि गलत पार्किंग करने वाले 2521 वाहनों को लिफ्ट किया गया। सात वर्ष से अधिक पुराने सभी टेंपो सड़क से बाहर कर दिए गए हैं। गलत पार्किंग कराने वाले 59 संस्थानों को नोटिस जारी कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा है कि अफसोस की बात है कि इन दावों का कहीं पर भी वास्तविक असर नहीं दिख रहा है। खाने की दुकानों, शराब की दुकानों और रेस्टोंरेंट के सामने वाहनों की पार्किंग अभी भी जारी है। फुटपाथों पर वाहनों की रिपेयरिंग करने वाले दुकानदारों का कब्जा है। संगम रोड पर सब्जी विक्रेता चबूतरा छोड़कर सड़क पर आ गए हैं। इसी प्रकार से चंद्रशेखर आजाद पार्क के सामने नए बने साइकिल ट्रैक और फुटपाथ पर फल विक्रेताओं ने कब्जा कर लिया है। नगर आयुक्त और एसपी यातायात इस मामले में संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
अवैध पार्किंग पर दिया है सख्त निर्देश
हाईकोर्ट ने 27 मई 2016 को अवैध पार्किंग और सड़कों पर कब्जे के खिलाफ कड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने शराब की दुकानों, रेस्टोरेंट और खाने पीने के स्टालों के सामने गलत तरीके से पार्किंग करने वालों से सख्ती से निपटने के लिए कहा है। इसी प्रकार से ऐसे संस्थानों, भवनों को चिह्नित कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है, जिन्होंने पार्किंग की व्यवस्था नहीं की है। इन आदेशों का कड़ाई से पालन न होने पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को सीधे जिम्मेदार बनाया जाएगा। याचिका पर 11 अगस्त को सुनवाई होगी।