नोटबंदी के साइड इफेक्ट से प्रतियोगी और छात्र भी परेशान हैं। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए फुटकर का इंतजाम करने में संघर्ष कर रहे प्रतियोगियों को अब दूसरे जिलों में होने वाली परीक्षा देने के लिए भी अलग से रुपये का जुगाड़ करना है। इससे उनकी चिंता बढ़ गई है। निराश और नाराज प्रतियोगियों ने 27 नवंबर को प्रस्तावित समीक्षा अधिकारी-सहायक समीक्षा अधिकारी (आरओ-एआरओ) प्रारंभिक परीक्षा-2016 स्थगित करने की मांग की है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले प्रतियोगियों ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के अलावा कलेक्ट्रेट में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भी सौंपा।
आयोग की नई नीति के तहत परीक्षा केंद्र दूसरे जिलों में बनाए जाने लगे हैं। इलाहाबाद के अभ्यर्थियों के कानपुर, लखनऊ आदि जिलों में परीक्षा केंद्र बनाए जाते हैं। आयोग दफ्तर पर पहुंचे प्रतियोगियों का कहना था कि ऐसे में परीक्षा देने के लिए आने-जाने तथा वहां ठहरने में उनके कम से कम तीन से चार हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं। 500-100 के नोटों पर रोक के बाद जिस तरह से कैश को लेकर परेशानी बनी है, उसमें ज्यादातर प्रतियोगियों के लिए रुपये का इंतजाम करना मुश्किल हो चला है। सबसे ज्यादा दिक्कत तो उनको है जो यहां किराए पर रहकर तैयारी कर रहे हैं।
तीन सूत्रीय मांग के माध्यम से प्रतियोगियों ने दिसंबर बाद परीक्षा कराने या संबंधित जिले में केंद्र बनाने तथा अभ्यर्थियों को परीक्षा भत्ता दिए जाने की मांग की। उनका कहना था कि चूंकि आयोग में कई मुद्दों पर ज्ञापन देकर पहले भी राहत की मांग की गई थी, लेकिन अफसरों ने नहीं सुनी। इसलिए अब की मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन देकर इसकी मांग की गई है। मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने हाईकोर्ट जाने की भी चेतावनी दी है। ज्ञापन सौंपने वालों मेें अवनीश पांडेय, अमित सिंह राणा, अजय सिंह, राघवेंद्र द्विवेदी, अमलेंदु सिंह, कृष्ण कुमार तिवारी, गिरिजेश सिंह, रजवंत सिंह, प्रशांत कौशल, प्रशांत तिवारी आदि शामिल रहे।