बैंकों में लगातार दो दिन की बंदी का असर रविवार को ज्यादा दिखा। एक दिन पहले शनिवार को ही अधिकतर एटीएम खाली या बंद हो चुके थे। उसके अगले दिन तो हालात और भी बदतर हो गए। एक से दूसरे एटीएम तक कैश की तलाश में लोग दौड़ते रहे। जहां कैश मिला भी तो घंटों की लंबी लाइन में लगकर। इसमें कुछ ही भाग्यशाली रहे। अधिकतर को निराश होकर लौटना पड़ा। शाम होते-होते जो थोड़े-बहुत एटीएम कैश दे रहे थे, वे भी बंद हो गए।
बैंक बंद होने से वैसे भी सारा भार एटीएम पर ही पड़ना था। लोगों को उम्मीद थी कि बैंकों ने इसको ध्यान में रखते हुए तैयारी जरूर की होगी, लेकिन बंदी के पहले ही दिन व्यवस्था नदारद थी। शहर के 85 फीसदी एटीएम बंद थे। लोग नगदी के लिए शहर का चक्कर का लगाते रहे। इसके अगले दिन एटीएम डिब्बा बन गए। सुबह के वक्त कुछ एटीएम से ही नगदी मिल रही थी। वे भी दोपहर होते-होते खाली हो गए। इस दौरान एटीएम के बाहर लंबी लाइन लगी रही। बहुत से ऐसे लोग रहे जो घंटों लाइन में लगे रहे और जब उनका नंबर आया तो पैसा खत्म हो गए। अल्लापुर के विवेक ने बताया कि एटीएम से पैसा मिलने की उम्मीद लिए वे सुबह ही सिविल लाइंस आ गए। उन्हें लगा कि यहां जरूर किसी न किसी एटीएम से कैश मिल जाएगा लेकिन हर जगह से निराशा ही हाथ लगी। शहर में बाहर से आरओ-एआरओ की परीक्षा देने आए अभ्यर्थी खासे परेशान नजर आए। सिविल लाइंस बस अड्डे के पास मछलीशहर जौनपुर से परीक्षा देने आए राकेश कुमार चौबे ने बताया कि यूनियन बैंक, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक के एटीएम का चक्कर लगाकर आए हैं, कहीं पैसा नहीं मिला। एक दोस्त से उधार लेकर घर वापस जाएंगे।