लिहाजा, याची ने अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट रेलवे की अदालत में दोषमुक्ति की अर्जी दाखिल की। लेकिन, वह खारिज हो गई। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि मुकदमे में देरी संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत कापड़ी के त्वरित सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन करती।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से वकील प्रसाद के मामले में दिए गए फैसले का हवाला देकर कहा कि त्वरित सुनवाई और शीघ्र न्याय हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। 39 साल में एक भी गवाही नहीं होने पर हैरान कोर्ट ने लंबित आपराधिक कार्यवाही पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी।