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High Court : 39 साल पुरानी घटना में एक भी गवाही नहीं, सरकार से जवाब तलब

Sun, 08 Dec 2024 01:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी की अदालत ने कैलाश चंद्र कपरी की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। याची पुलिसकर्मी ने इलाहाबाद के अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट (रेलवे) की ओर से दोषमुक्ति की अर्जी को खारिज करने वाले आदेश की वैधता को चुनौती दी थी।

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अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मारपीट की 39 साल पुरानी घटना में एक भी गवाह नहीं होने पर पुलिसकर्मी के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही चार हफ्ते में सरकार से जवाबी हलफनामा तलब किया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी की अदालत ने कैलाश चंद्र कपरी की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। याची पुलिसकर्मी ने इलाहाबाद के अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट (रेलवे) की ओर से दोषमुक्ति की अर्जी को खारिज करने वाले आदेश की वैधता को चुनौती दी थी।

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मामला इलाहाबाद रामबाग रेलवे स्टेशन का है। 1989 में आरोपी के खिलाफ रेलवे अधिनियम के साथ ही मारपीट समेत कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। 1991 में ट्रायल कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया। लेकिन, 39 साल बाद एक भी गवाही नहीं हुई। तीन दशक से ज्यादा लंबित रहा यह मामला याची के प्रोन्नति में बाधक बना। प्रोन्नति के लिए तैयार विभागीय सूची में उसका नाम बाहर कर दिया गया।

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लिहाजा, याची ने अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट रेलवे की अदालत में दोषमुक्ति की अर्जी दाखिल की। लेकिन, वह खारिज हो गई। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि मुकदमे में देरी संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत कापड़ी के त्वरित सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन करती।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से वकील प्रसाद के मामले में दिए गए फैसले का हवाला देकर कहा कि त्वरित सुनवाई और शीघ्र न्याय हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। 39 साल में एक भी गवाही नहीं होने पर हैरान कोर्ट ने लंबित आपराधिक कार्यवाही पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी।

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